बृजमोहन ने राही की ‘पिता छांव वट वृक्ष की’ का किया विमोचन

रायपुर: रविवार को पितृ दिवस के अवसर पर नवरंग काव्य मंच द्वारा वृन्दावन सभागार सिविल लाईन्स में दोहा कृति – ‘पिता छाँव वट वृक्ष की‘‘ का विमोचन एवं काव्य संध्या ’’पिता छाँव वट वृक्ष की’’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश भर से पधारे रचनाकारों ने काव्यपाठ किया। साथ ही साहित्यकारों को नवरंग साहित्य सम्मान से सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम की शुरूआत कवि राजेश जैन राही ने “देवी हे माँ शारदे, दे मुझको वरदान। बाबू जी के त्याग का, करना मुझे बखान।।” पंक्तियों के साथ माँ सरस्वती का आह्वान किया. कार्यक्रम का शुभारंभ सरिता सरोज ने सरस्वती वंदना के साथ किया.

दोहा कृति का विमोचन

गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कवि राजेश जैन राही की दोहा कृति ‘‘पिता छाँव वट वृक्ष की‘‘ के नये संस्करण का विमोचन बृजमोहन अग्रवाल, कृषि मंत्री छत्तीसगढ़ शासन ने किया । प्रस्तुत कृति में पिता को समर्पित राही द्वारा लिखित 365 दोहे हैं। प्रत्येक दोहे में पिता या पर्यायवाची शब्द को बहुत ही खूबसूरती के साथ पिरोया गया है। दोहा कृति की भूमिका वरिष्ठ साहित्यकार अशोक अंजुम, समीक्षा रघुविंद्र यादव, नारनौल ने लिखी है।

माँ हमारी भक्ति है तो पिता हमारी शक्ति : बृजमोहन

फादर्स डे के पर पिता पर केंद्रित  पुस्तक “पिता छांव वट वृक्ष की” का विमोचन करते हुए प्रदेश के कृषि एवं सिंचाई मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि यह सच है कि लेखकों ने मां को अधिक महत्व देते हुए उनकी महत्ता पर ज्यादा बातें लिखी है। परंतु यह भी एक सच है माता और पिता दोनों ही अपनी अपनी जगह हमारे आधार स्तंभ हैं। माँ हमारी भक्ति है तो पिता हमारी शक्ति है । इन दोनों के आशीर्वाद से ही हमारे जीवन की  सफलता तय होती है।
इस मौके पर बृजमोहन ने कहा कि भारत की पहचान यहा की परिवार संस्कृति रही है। जिसे पिता जोड़कर रखते थे। परंतु आज परिवार निरंतर बिखरता दिखाई दे जाता है। परिवार संस्कृति का क्षरण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि माता पिता अपने बच्चों की खुशियों के लिए जीवनभर त्याग करते हैं, कष्ट सहते है। वे बड़ी उम्मीदों के साथ अपने बच्चों की शिक्षा दीक्षा और उनके उज्जवल भविष्य का निर्माण करते रहे, आज वह मां-बाप वृद्धाश्रम में दिखाई दे रहे हैं।
हमारी भारतीय संस्कृति में वैसे तो फादर्स डे का महत्व नहीं है, क्योंकि हमारी संस्कृति  हर दिन माता पिता को पूजने की सीख देती है। आज अपनी जड़ों की ओर लौटने की आवश्यकता है।

अतिथियों के उद्गार –

डॉ. विनय पाठक अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने कहा कि – प्रस्तुत कृति का प्रकाशन छत्तीसगढ़ के लिये गौरव की बात है। दोहों की श्रृखंला प्रणम्य गीत सी प्रतीत होती है।
डॉ. सुभद्रा राठौर ने कृति पर अपने विचार रखते हुए कहा – राही ने अलंकार के चक्कर में न पड़कर सरल, सहज शब्दों का प्रयोग से कर कृति को जनमानस के लिये बेहद उपयोगी बना दिया है। पिता पुत्र संबंध के विविध आयामों को समेटे यह कृति पठनीय, संग्रहणीय है। उन्होंने विविध दोहों का उल्लेख कर राही के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
नर्मदा प्रसाद मिश्र ने दोहा छंद पर लिखी प्रस्तुत कृति को साहित्य जगत में मील का पत्थर कहा। उन्होंने कृति को ज्ञानपीठ पुरस्कार का हकदार कहा।
जबलपुर से पधारी वरिष्ठ लेखिका मंजूषा मन ने कहा जब भी पिता पर कविता की बात चलेगी राही की इस कृति की चर्चा होगी। साल के प्रत्येक दिन का एक दोहा श्री राही ने लिखा है। छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी की उपाध्यक्षा नजमा अजीम खान ने कृति का उर्दू में अनुवाद कराने का विचार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में कवि राजेश जैन राही के पिता नेमीचंद जी जैन जो रांची झारखंड में निवासरत हैं का ओडियो संदेश सुनाया गया। जिसका उपस्थित काव्य रसिकों ने करतल ध्वनि से अनुमोदन किया। कवि राही ने प्रस्तुत कृति के अपने कुछ दोहों का पाठ कर सदन का वातावरण करूण रस पितृ भाव से ओतप्रोत कर दिया।

इनका हुआ सम्मान

इस अवसर पर युवा पत्रकारों श्रिया पाण्डेय, कंचन ज्वाला कुंदन, चंद्रेश चैधरी का सम्मान किया गया। इसके साथ ही मीर अली मीर, प्रकाश चंद सोहनी, ए.बी. दुबे दीप्त, डॉ. मंजूला श्रीवास्तव, योगेश योगी, सत्येन्द्र तिवारी, अनिल श्रीवास्तव, श्रीमती शिवानी मैत्रा को नवरंग साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया। सामाजिक संस्था वरिष्ठ एवं कनिष्ट नागरिक क्लब का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विनय पाठक अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने की। इस मौके पर डॉ. सुभद्रा राठौर एवं नर्मदा प्रसाद मिश्र ने कृति पर अपने बहुमूल्य विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन मनोज शुक्ला एवं ओशीन काम्बोज ने किया। अंत में संस्था के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण लाहोटी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

उपस्थित अतिथि

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर, लेखक पत्रकार गिरीश पंकज, कवि रामेश्वर वैष्णव, दीपक मित्तल, आई.एन. सिंह, एम. राजीव, अशोक टिबडेवाल, डॉ. रामकुमार बेहार, डॉ. वर्णिका शर्मा, सोहनलाल लोधी, आशीष सिंघानिया, रेवा शमा, श्रीमती उर्मिला देवी उर्मि, डॉ. सीमा श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव विशेष रुप से उपस्थित थे।

  • facebook
  • googleplus
  • twitter
  • linkedin
  • linkedin
  • linkedin
Previous «
Next »

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *