जफरयाब जिलानी: अयोध्या मामले में आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट मंजूर नहीं

जफरयाब जिलानी: अयोध्या मामले में आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट मंजूर नहीं

राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सुनने को मिल रही है। जहां यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा और अन्य हिंदू संगठन और कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इसका स्वागत किया है, वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य, ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक व बाबरी मस्जिद के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे वकील जफरयाब जिलानी अलग ही प्रतिक्रिया दी है।

जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव का स्वागत करते हैं, लेकिन हमें कोई भी आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट स्वीकार नहीं होगा। जिलानी आगे कहते हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कोई मध्यस्थता करते हुए कोई हल निकलता है, तो हम इसका स्वागत करेंगे। हमारा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता में ही यह पूरी तरह वैध होगा और हम आउट ऑफ कोर्ट से भी बच जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट की बहुत से नाकाम कोशिशें हो चुकी हैं। ऐसे में अदालत के बाहर बैठकर कोई हल निकालना संभव नहीं है।

बता दें कि कोर्ट के बाहर समझौते को लेकर बहुत से मुस्लिम नेता बंटे हुए नजर आ रहे हैं। जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का वेलकम किया है। वह कहते हैं कि बाबरी मस्जिद मसले पर दोनों पक्षों को मिल बैठकर ही समाधान करना चाहिए।

मुस्लिम धर्मगुरु कल्बे जव्वाद का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा, हम सभी को मान्य होगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कोर्ट के बाहर वार्ता के जरिए हल निकालने की कोशिश हुई हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

इस बीच एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। वह लिखते हैं, “मुझे आशा है कि सुप्रीम कोर्ट अवमानना याचिका पर भी फैसला सुनाएगा, जो 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के समय से पेंडिंग है।”

इस मामले में आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर पहले से ही मौजूद था, ऐसे में वहां राम मंदिर ही बनना चाहिए। इस मसले को बातचीत से सुलझाना ही होगा। अब इसका हल निकालने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। सिन्हा ने कहा कि बाबरी मस्जिद कमेटी कोई ठोस सबूत नहीं दे पाई कि वहां पर कोई मस्जिद थी।

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