पारिवारिक झगड़े में कोर्ट ने व्हाट्सएप के ‘नीले डबल टिक’ को माना सबूत

4 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही में व्हाट्सएप और ईमेल का उपयोग करने की अनुमति दी थी

पारिवारिक झगड़े में कोर्ट ने व्हाट्सएप के ‘नीले डबल टिक’ को माना सबूत

पारिवारिक झगड़ों में अक्सर बचाव पक्ष नोटिस न सौंपे जाने को लेकर कई बहाने बनाता है। लेकिन पारिवारिक विवाद का एक अनोखा मामला सामने आया है जिसमें बचाव पक्ष को व्हाट्सएप पर नोटिस सौंपे गए और कोर्ट ने इसे मंजूर भी कर लिया।

दरअसल, एक ससुर ने पारिवारिक विवाद में अपनी बहू, उसके मां-बाप और उसके दोस्तों को व्हाट्सएप पर नोटिस भेजा। जब मैसेज उनके फोन में पहुंचा तो उन्होंने इसपर क्लिक किया जिसकी वजह से ससुर के व्हाट्सएप में ‘नीले डबल टिक’ आ गए। ससुर ने इसका प्रिंटआउट निकलवाया और कोर्ट में बतौर सबूत जमा करवा दिया कि बचाव पक्ष को नोटिस सौंप दिए गए हैं। प्रिंटआउट को रोहिणी कोर्ट के सीनियर सिविल जज कम रेंट कंट्रोलर (नॉर्थ) सिद्धार्थ माथुर ने सबूत के तौर पर मंजूर कर लिया।

6 मई को दिल्ली के मॉडल टाउन के एक निवासी ने सिविल कोर्ट में अपील दायर की थी कि उनके बेटे, बहू और बहू के मां-बाप और उसके दोस्तों को उनकी संपत्ति में अतिक्रमण करने से रोका जाए। इस पर कोर्ट ने उनसे कहा कि पांचों को नोटिस भेजें। लेकिन अभियोगी ने जवाब दिया कि इसमें समय लगेगा और इस बात की बहुत संभावना है कि नोटिस देने से पहले वे उनके घर में घुस जाएं।

हालांकि, इस पर कोर्ट ने उन्हें दूसरा तरीका बताया और कहा कि आप व्हाट्सएप के जरिए भी इन लोगों को नोटिस भेज सकते हैं। अभियोगी ने ऐसा ही किया और जब बचाव पक्ष के लोगों ने व्हाट्सएप में नोटिस देखा तो ‘नीला डबल टिक’ आ गया। जिसके बाद ‘नीले डबल टिकट’ का अभियोगी ने प्रिंटआउट कर लिया।

कोर्ट ने अपने ऑर्डर में इस बात को शामिल किया कि पिता ने जनकपुरी में रहने वाले अपने बेटे को नोटिस सौंप दिया है। इसके बाद 8 मई को उन्होंने सारे नोटिस सौंपने की प्रिंटआउट कॉपी कोर्ट में जमा करा दी।

अपने आदेश में जस्टिस माथुर ने कहा कि मैंने रिकॉर्ड देखे मुकदमे वाली संप्ति अभियोगी पिता के नाम है और वह ही इसके एकमात्र मालिक हैं। उन्होंने कहा कि कानून की उचित प्रक्रिया के बिना बचाव पक्ष को अगली सुनवाई तक संपत्ति में जाने की इजाजत नहीं है। साथ ही जस्टिस माथुर ने कहा कि हालांकि, 1 से 4 नंबर तक के बचाव पक्ष को व्हाट्सएप के जरिए नोटिस सौंपे गए, लेकिन फिर भी मैं इसे उपयुक्त समझता हूँ कि उन्हें एक बार फिर से नोटिस सौंपा जाना चाहिए।

गौरतलब है कि 4 मई को दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही में व्हाट्सएप और ईमेल का उपयोग करने की अनुमति दी थी। जस्टिस राजीव सहाय इंडलॉ ने अभियोगी को व्हाट्सएप, टेक्सट या ईमेल के जरिए बचाव पक्ष को समन सौंपने की इजाजत दी थी।

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