होरी जैसवाल
रायपुर ; साय सरकार की सवा दो साल में छत्तीसगढ़ प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारियों जैसे-आउटसोर्सिंग (प्लेसमेंट), सेवा प्रदाता, ठेका, समूह/समिति के माध्यम से नियोजन, जॉबदर, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत श्रमिक, मानदेय, अशंकालिक के लिए किसी प्रकार किसी प्रकार की घोषणा नहीं होने से निराश एवं आहात है| जबकि ये कर्मचारी प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा रहा है|
भारतीय जनता पार्टी जब विपक्ष में थे तो उनके अनेक वरिष्ठ नेता/जनप्रतिनिधियों ने हमारे मंच में आकर हमारी समस्याओं को सुना एवं अनियमित कर्मचारियों की समस्याओं को भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर इनका यथाशीघ्र निराकरण करने की बात कही थी तथा छत्तीसगढ़ के लिए मोदी की गारंटी 2023 पत्र के “वचनबद्ध सुशासन” अंतर्गत बिंदु क्र. 2 में एक कमिटी गठित कर कमेटी में अनियमित कर्मचारियों को सम्मिलित करते हुए समीक्षात्मक प्रक्रिया प्रारंभ करने का उल्लेख किया है| लेकिन कमेटी गठन आदेश में अनियमित कर्मचारियों का कोई उल्लेख नहीं है|
सरकार इन सवा 2 वर्षों में अनियमित कर्मचारियों के लिए कुछ नहीं किया| वादा के विपरीत अनियमित कर्मचारियों की छटनी की जा रही है, अनेक विभागों में वेतन लंबित है, संविदा वेतन अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है, न्यूनतम वेतन में विगत 8 वर्षों से वृद्धि नहीं की गई है, संविदा वेतन में ढाई साल कोई बढ़ोत्तरी नहीं| अनेक विभाग में श्रम सम्मान राशी नहीं दी जा रही है|
अनियमित संघो के पदाधिकारियों ने अपने मांगो/समस्याओं को लेकर निरंतर माननीय मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसदों से आवेदन निवेदन करते आ रहे है, परन्तु सरकार अनियमित कर्मचारियों की अनदेखी कर रही है|
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन इस परिपेक्ष्य में “एक हस्ताक्षर-मुख्यमंत्री के नाम” अभियान 10-30 अप्रैल से चला रहा है, इस अभियान में समस्त विभाग/कार्यालय में कार्यरत अनियमित कर्मचारी अपनी समस्याओं के समाधान हेतु माननीय मुख्यमंत्री को उनके इमेल आईडी में भेजकर अनुरोध करेंगे|
समस्त अनियमित कर्मचारी/सहयोगी अनियमित संघों से अपील है कि इस अभियान के माध्यम से अपनी समस्याओं को माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष अवश्य रखें|
प्रमुख मांग :
1. अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण/स्थायीकरण किया जावे
2. कार्य से पृथक कर्मचारियों को बहाल किया जावे
3. अत्यंत कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जावे
4. अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन किया जावे
5. आउट सोर्सिंग/ठेका/सेवा प्रदाता/समूह/समिति के माध्यम से नियोजन बंद किया जावे…








