रायपुर, 17 जुलाई 2026 : जैव विविधता अनुसंधान में नई तकनीकों से स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को परिचित कराया जा रहा है, ताकि वे पारिस्थितिकी संरक्षण और प्रजातियों की पहचान में आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर सकें। छात्र ग्लोबल जैव विविधता सूचना सुविधा और आई-नेचुरलिस्ट मंच जैसे डेटाबेस का उपयोग करना सीख रहे हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड एवं छत्तीसगढ़ राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में संत गुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुरूद जिला धमतरी में जैव विविधता अनुसंधान पर विशेष जागरूकता एवं प्रेरक व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्राणीशास्त्र (एम.एससी.) के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को ‘जैव विविधता अनुसंधान के विविध आयाम एवं भविष्य की संभावनाएं’ विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता शोध के लिए महत्वपूर्ण
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के वैज्ञानिक ने विद्यार्थियों को जैव विविधता संरक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ वन, आर्द्रभूमि, नदियों, पर्वतीय क्षेत्रों, वन्यजीवों, जनजातीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है। ये सभी क्षेत्र वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण हैं। विद्यार्थियों को वन जैव विविधता, वन्यजीव एवं पक्षी अध्ययन, आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी, जलीय जैव विविधता, पारंपरिक ज्ञान, जैव संसाधन और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर शोध की संभावनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।
आधुनिक तकनीकों से जैव विविधता संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को जैव विविधता के अध्ययन और संरक्षण में आधुनिक तकनीकों के उपयोग की जानकारी दी गई। इनमें रिमोट सेंसिंग, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस), जीपीएस, ड्रोन आधारित सर्वेक्षण, डीएनए बारकोडिंग, पर्यावरणीय डीएनए (ई-डीएनए), जैव सूचना विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और डिजिटल डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकें शामिल हैं। बताया गया कि इन तकनीकों के माध्यम से जैव विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, निगरानी और संरक्षण कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
शोध कार्य के हर चरण की दी गई जानकारी
विद्यार्थियों को शोध विषय के चयन, अनुसंधान प्रस्ताव तैयार करने, वैज्ञानिक फील्ड सर्वेक्षण, नमूना संग्रहण, डेटा विश्लेषण और शोध पत्र लेखन के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में शोध कार्य प्रकाशित करने तथा अनुसंधान में नैतिक मूल्यों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
स्थानीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित शोध को समाज, नीति निर्माण और संरक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पूछे सवाल
कार्यक्रम के संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने जैव विविधता अनुसंधान, शोधवृत्ति, उच्च शिक्षा, आधुनिक अनुसंधान उपकरणों और करियर की संभावनाओं से जुड़े सवाल पूछे। वैज्ञानिक ने सभी सवालों का विस्तारपूर्वक समाधान किया। महाविद्यालय के प्राचार्य और प्राणीशास्त्र विभाग के प्राध्यापकों ने कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी और प्रेरणादायी बताया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के वैज्ञानिक जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में अनुसंधान की संस्कृति विकसित करने के साथ ही उन्हें पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम में शामिल स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने छत्तीसगढ़ की जैव विविधता, आधुनिक अनुसंधान तकनीकों और शोध की संभावनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। यह पहल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें जैव विविधता संरक्षण एवं अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई।








