जटिल सर्जरी से खुला मुंह, आयुष्मान योजना से मिला निःशुल्क उपचार

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जटिल सर्जरी से खुला मुंह, आयुष्मान योजना से मिला निःशुल्क उपचार

रायपुर, 23 अप्रैल 2026 : शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध सिम्स अस्पताल, बिलासपुर के दंत चिकित्सा विभाग ने एक दुर्लभ एवं जटिल शल्य चिकित्सा कर 24 वर्षीय युवक के बचपन से बंद जबड़े को सफलतापूर्वक खोलने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। अविकसित निचले जबड़े के कारण वर्षों से सामान्य रूप से मुंह नहीं खोल पाने वाले मरीज का आधुनिक तकनीक से सफल ऑपरेशन किया गया। आयुष्मान भारत योजना के तहत उसे निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया।

मुंगेली जिले के अमली कापा निवासी 24 वर्षीय युवक बचपन में लगी चोट के कारण बाइलेटरल टेम्पोरो-मैंडिबुलर जॉइंट (B/L TMJ) एंकिलोसिस से पीड़ित था। इस बीमारी के कारण उसके जबड़े की वृद्धि रुक गई थी और वह वर्षों से केवल तरल आहार ही ले पाता था। पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से वह कुपोषण और शारीरिक दुर्बलता का भी शिकार हो गया था। निजी अस्पतालों में उपचार का अनुमानित खर्च 3 लाख रुपये से अधिक होने के कारण वह इलाज नहीं करा सका। बाद में सिम्स पहुंचने पर उसे आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क उपचार की सुविधा मिली।

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दंत चिकित्सा विभाग में मरीज की विस्तृत जांच, रक्त परीक्षण, सीबीसीटी एवं अन्य रेडियोलॉजिकल जांच के बाद ऑपरेशन की योजना बनाई गई। चूंकि मरीज का मुंह पूरी तरह बंद था, इसलिए निश्चेतना देने के लिए ट्रेकियोस्टॉमी कर श्वास नली स्थापित की गई। इसके बाद 4 जून 2026 को लगभग छह से सात घंटे तक चली जटिल सर्जरी में डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस तकनीक का उपयोग कर अविकसित निचले जबड़े को लंबा करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

दोनों ओर विशेष डिस्ट्रैक्शन उपकरण लगाए गए, जिनकी सहायता से अगले तीन से चार माह में जबड़ा धीरे-धीरे सामान्य आकार की ओर विकसित होगा।सर्जरी के बाद मरीज को एक सप्ताह तक अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर उसे उपकरणों के साथ छुट्टी दी गई। वर्तमान में नियमित फॉलोअप के दौरान उसके मुंह का खुलना प्रारंभ हो गया है और वह सामान्य जीवन की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

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यह जटिल ऑपरेशन दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. भूपेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष एवं ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश तथा उनकी टीम के सदस्यों डॉ. जण्डेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी किनीकर, डॉ. हेमलता राजमणी, डॉ. प्रकाश खरे एवं डॉ. सोनल पटेल द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। निश्चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम तथा रेडियोडायग्नोसिस विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह का भी इस जटिल उपचार में महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि दंत एवं मुख रोग केवल दांतों तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनका सीधा प्रभाव व्यक्ति के पोषण, बोलने की क्षमता, चेहरे के विकास और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सिम्स में आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ चिकित्सकों और बहु-विषयक टीम के समन्वय से ऐसे जटिल मामलों का भी सफल उपचार किया जा रहा है तथा भविष्य में भी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संस्थान प्रतिबद्ध है।

चिकित्सक सह अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि बचपन से जबड़ा बंद रहने जैसी दुर्लभ समस्याओं का समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार कराना आवश्यक है। उन्होंने आमजन से दांत एवं मुख संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज नहीं करने और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेकर उपचार कराने की अपील की।

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