कोनगुड़ में विकसित हो रहा आकांक्षा ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र

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रायपुर, 21 अगस्त 2026 : कोण्डागांव, जिले के सुदूर ग्राम कोनगुड़ में नीति आयोग के सौजन्य से आकांक्षा ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दूरस्थ एवं वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को उद्योग आधारित कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें रोजगार से जोड़ने का स्थायी मॉडल विकसित करना है।

विकासखंड फरसगांव के ग्राम कोनगुड़ में स्थापित किए जा रहे इस केंद्र के माध्यम से प्रतिवर्ष 1,000 से 1,500 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने तथा 300 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

कोनगुड़ में विकसित हो रहा आकांक्षा ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र

गुरुवार को कांकेर सांसद भोजराज नाग एवं विधायक नीलकंठ टेकाम ने केंद्र में प्रारंभिक प्रशिक्षण चरण में किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया। उन्होंने केंद्र की व्यवस्थाओं एवं रोजगार सृजन की संभावनाओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने केंद्र भ्रमण के लिए आए पुनर्वासित व्यक्तियों से भी चर्चा की और उन्हें रोजगार से जुड़कर मुख्यधारा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

माओवाद प्रभावित क्षेत्र में रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई पहल

सांसद भोजराज नाग ने कहा कि यह गर्व की बात है कि जो क्षेत्र कभी माओवादियों का गढ़ हुआ करता था, आज वहां पुनर्वासित लोगों के साथ मिलकर विकास की नई इबारत लिखी जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दृढ़ संकल्प से क्षेत्र माओवाद से मुक्त हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को यहां के युवक-युवतियां पूरा करेंगे, स्वयं आत्मनिर्भर बनेंगे और भारत को भी आत्मनिर्भर बनाने में योगदान देंगे।

विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि माओवाद समाप्ति के बाद वापस लौटे लोगों ने अब दोबारा उस अंधेरे रास्ते पर नहीं जाने और आने वाली पीढ़ी को भी उससे दूर रखने का संकल्प लिया है। यह खुशी की बात है कि जिस कोनगुड़ गांव में कभी माओवादी हिंसा के कारण जाना मुश्किल था, आज वहां कौशल एवं रोजगार का केंद्र स्थापित हो रहा है।

उन्होंने इस पहल के लिए सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माओवाद से मिली आजादी को विकास और रोजगार के अवसरों के माध्यम से साकार किया जा रहा है।

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कलेक्टर  नूपुर राशि पन्ना ने बताया कि नीति आयोग के सहयोग से आकांक्षा ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र की स्थापना की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में यहां 100 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें 85 महिलाएं शामिल हैं और 04 आत्मसमर्पित व्यक्ति है। जिले के आत्मसमर्पित लोगों एवं उनके परिवारों को रोजगार के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से यह केंद्र स्थापित किया गया है।

पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति के तहत पुनर्वासित व्यक्तियों को आज कोनगुड़ का भ्रमण कराया गया, ताकि वे यहां संचालित गतिविधियों से प्रेरित होकर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि कोनगुड़ में पुनर्वासित व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में यह एक सराहनीय पहल है।

’इस दौरान केशकाल, धनोरा, इरागांव और उरंदाबेड़ा थाना के लगभग 154 आत्म समर्पित माओवादी कैडरों ने भी शिविर का लाभ लिया, जिनमें 45 से अधिक लोगों ने प्रशिक्षण हेतु सहमति दी। इन पुनर्वासित लोगों को आगामी दिनों में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।’

प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास, रोजगार से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही युवतियां

आकांक्षा-ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही युवतियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कोनगुड़ निवासी पार्वती मरापी ने बताया कि वे केंद्र में स्टोर रूम में कार्य कर रही हैं और यहां काम करना उन्हें अच्छा लगता है। वहीं कल्पना पटेल ने बताया कि वे पहले खेती-किसानी का कार्य करती थीं। केंद्र में प्रशिक्षण और कार्य का अवसर मिलने के बाद उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पहली सैलरी मिलने पर वह अपनी मां को देंगी।

कभी जिस क्षेत्र में माओवादी संगठन का खौफ था, आज उसी क्षेत्र में आत्मसमर्पण कर चुके लोग भी रोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की नई शुरुआत कर रहे हैं। रजनू कोर्राम ने बताया कि उन्होंने 13 वर्ष तक जंगल में जीवन बिताया। आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास केंद्र में तीन माह का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अब वे कोंडागांव से कोनगुड़ आकर प्रशिक्षण दे रहे हैं। यह पहल उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव के साथ ही उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम बन रही है।

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आकांक्षा ग्रामीण कौशल एवं नवाचार केंद्र का संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) आधारित सतत रोजगार मॉडल के रूप में किया जा रहा है। युवाओं को विभिन्न रोजगारोन्मुखी कौशल से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना एवं एनएपीएस के अंतर्गत पंजीयन प्रक्रिया भी जारी है।

परियोजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 1,000 से 1,500 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, पात्र अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम 100 प्रतिशत प्लेसमेंट तथा गारमेंट उत्पादन इकाई के माध्यम से 300 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

यह केंद्र कोण्डागांव जिले के दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को उनके क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण, उद्योग से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। इससे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका के स्थायी अवसर भी बढ़ेंगे।

इस अवसर पर जनपद पंचायत के अध्यक्ष मानकू राम कोर्राम एवं स्थानीय

जनप्रतिनिधिगण, जिला पंचायत के सीईओ अविनाश भोई, अपर कलेक्टर चित्रकांत चाली ठाकुर, एसडीएम अश्वन कुमार पुसाम, एसडीओपी अभिनव उपाध्याय, जनपद पंचायत सीईओ रूपेन्द्र कुमार नेताम सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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