बचत से कारोबार तक, मुर्गी पालन से मंजू मड़े ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की कहानी

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बचत से कारोबार तक, मुर्गी पालन से मंजू मड़े ने गढ़ी आत्मनिर्भरता की कहानी

रायपुर, 25 अगस्त 2026 : महिलाएं मुर्गी पालन और अन्य पशुपालन जैसी गतिविधि से जुड़ी हुई हैं। इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाएं मुर्गी पालन से जुड़ गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं और किसान छोटे पैमाने पर पोल्ट्री फार्मिंग शुरू करके अंडे और मांस बेचकर नियमित आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। मुर्गी पालक महिलाएं मुर्गी पालन को लेकर महिलाओं को प्रोत्साहित भी कर रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। बीजापुर विकासखंड के ग्राम बोरजे की मंजू मड़े इसकी प्रेरक मिसाल हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर मंजू ने मुर्गी पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाया और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

’स्व-सहायता समूह ने दिखाई आगे बढ़ने की राह’

मंजू वर्ष 2017 में ओम साई स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत, वित्तीय प्रबंधन और स्वरोजगार से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया। समूह के सहयोग से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। वर्ष 2025 में मंजू एकीकृत फार्मिंग क्लस्टर से जुड़ीं और मुर्गी पालन शुरू किया। व्यवसाय के लिए उन्हें 60 हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने शुरुआत में 400 चूजों का पालन शुरू किया।
’400 चूजों से शुरू हुआ सफर’

मंजू ने मेहनत और बेहतर देखभाल से मुर्गी पालन को आगे बढ़ाया। शुरुआती चरण में करीब 21 दिनों के पालन-पोषण के बाद उन्होंने 169 चूजों को 70 रुपये प्रति चूजा की दर से बेचकर 11,830 रुपये की आय अर्जित की। शेष मुर्गियों को उन्होंने आगे पालन के लिए रखा। लगातार मेहनत और बेहतर प्रबंधन से उनका कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया। आज उनके द्वारा तैयार मुर्गियां लगभग 500 रुपये प्रति मुर्गी की दर से बिक रही हैं। अब तक मंजू करीब 85 हजार रुपये की बिक्री कर चुकी हैं।

’परिवार को मिली आर्थिक मजबूती’

मुर्गी पालन से होने वाली आय ने मंजू के परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। अब वह अपनी आजीविका के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि स्वयं मेहनत कर परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।

मंजू बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने, प्रशिक्षण प्राप्त करने और ऋण की सुविधा मिलने से उन्हें अपने व्यवसाय को शुरू करने का अवसर मिला। उन्होंने इस सहयोग के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

’गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा’

मंजू मड़े की सफलता यह बताती है कि नियमित बचत, प्रशिक्षण, आसान ऋण और मेहनत के सहारे ग्रामीण महिलाएं भी अपना व्यवसाय खड़ा कर सकती हैं। उनकी सफलता देखकर गांव की दूसरी महिलाएं भी स्वरोजगार और आजीविका के नए साधनों से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार अवसर उपलब्ध करा रही है। मंजू की कहानी इसी प्रयास का परिणाम है। मंजू मड़े की सफलता का संदेश साफ है कि जब मेहनत को सही अवसर और शासन की योजनाओं का साथ मिलता है, तो छोटे प्रयास भी आत्मनिर्भरता की बड़ी कहानी लिख सकते हैं।

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