रायपुर, 23 सितंबर 2026 : दृढ़ इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं के सही मार्गदर्शन से किस तरह एक साधारण किसान आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम कर सकता है, इसे बस्तर जिले के ग्राम कुम्हारवंड निवासी डमरू कश्यप ने साबित कर दिखाया है।
आठवीं तक शिक्षित डमरू कश्यप मूल रूप से एक कृषक हैं, लेकिन खेती से पर्याप्त आमदनी न होने के कारण उनके परिवार को अक्सर गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था।
परिवार के भरण-पोषण और अतिरिक्त आय का जरिया तलाशने के दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध वनोपज का सदुपयोग करने की ठानी। बस्तर में इमली के भारी उत्पादन को देखते हुए उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ इमली चपाती निर्माण की इकाई स्थापित करने का साहसिक फैसला लिया।
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उनके इस सपने को तब नई दिशा मिली जब जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र जगदलपुर द्वारा आयोजित शिविर में उन्हें केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना की जानकारी मिली।
विभागीय अधिकारियों के निरंतर मार्गदर्शन से डमरू कश्यप ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर अपना प्रोजेक्ट तैयार किया और भारतीय स्टेट बैंक बकावण्ड शाखा में आवेदन सौंपा। बैंक ने उनके उद्यम पर भरोसा जताते हुए 70 हजार रुपए का ऋण मंजूर किया, जिस पर योजना के तहत उन्हें 35 हजार 840 रुपए का शासकीय अनुदान भी प्राप्त हुआ।
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वित्तीय सहायता मिलते ही उन्होंने पूरी लगन के साथ इमली चपाती निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू कर दिया। उनकी मेहनत जल्द ही रंग लाई और उनके द्वारा तैयार इमली चपाती की मांग स्थानीय हाट-बाजारों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ने लगी। आज उनकी इस सूक्ष्म इकाई का वार्षिक टर्नओवर ढाई लाख रुपए तक पहुंच चुका है।
इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह मजबूत हुई है, बल्कि उन्होंने दो अन्य स्थानीय लोगों को भी रोजगार से जोड़कर स्वावलंबी बनाया है। पारंपरिक खेती की सीमाओं से निकलकर सूक्ष्म उद्यमिता के जरिए सफलता की यह नई इबारत लिखने वाले डमरू कश्यप आज पूरे क्षेत्र के युवाओं और किसानों के लिए आत्मनिर्भरता के सशक्त प्रतीक बन चुके हैं।








