रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा बड़ी जीत की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है। रुझानों में भाजपा को बहुमत के साथ ही अब चर्चा इस बात को लेकर भी हो रही है कि यदि परिणाम इसके अनुरूप ही रहे और पार्टी सत्ता में आई तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा? छत्तीसगढ़ में 2003 से 2018 तक, 15 वर्ष लंबी सरकार का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर रमन सिंह को ही भाजपा मुख्यमंत्री बनाएगी या किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के लिए प्रत्याशी घोषित करने की जगह पीएम नरेंद्र मोदी का चेहरा आगे कर सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने का फॉर्मूला रंग लाया तथा भाजपा अब 5 वर्ष पश्चात् फिर से सरकार बनाने की दहलीज पर खड़ी दिखाई दे रही है। सीएम की कुर्सी पर रमन सिंह का दावा खारिज तो नहीं किया जा सकता लेकिन ये उतना मजबूत भी नहीं दिखाई दे रहा।
वही अब यदि रमन सिंह मुख्यमंत्री नहीं बनते हैं तो छत्तीसगढ़ में सरकार की कमान संभालने के लिए भाजपा किसको आगे करेगी? छत्तीसगढ़ में भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए अरुण साव, सरोज पांडेय से लेकर लता उसेंडी तक, कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। कौन-कौन से हैं वह चेहरे जिनके नाम छत्तीसगढ़ के अगले सीएम के लिए दौड़ में हैं?
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अरुण साव छत्तीसगढ़ भाजपा के अध्यक्ष हैं तथा सूबे में भाजपा के चुनाव अभियान की अगुवाई की। वर्ष 2003 में जब भाजपा पहली बार छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज हुई थी, तब भी पार्टी बिना मुख्यमंत्री फेस घोषित किए लड़ी थी। तब चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने जब सरकार बनाई, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंप दी थी। इस बार भी हालात कमोबेश वैसे ही हैं। भाजपा यदि सरकार बनाती है तो मुख्यमंत्री पद पर प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव का दावा मजबूत माना जा रहा है।
सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष होना भर ही नहीं, जातीय समीकरण भी अरुण साव के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। अरुण साव OBC वर्ग के साहू समाज से आते हैं। साहू समाज छत्तीसगढ़ की सियासत में मजबूत दखल रखता है। सूबे में साहू समाज की आबादी लगभग 12 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ में साहू समाज की अहमियत का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक चुनावी रैली में कहा था कि यहां जो साहू समाज है, इसी समाज को गुजरात में मोदी कहा जाता है।
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विजय बघेल दुर्ग लोकसभा सीट से सांसद हैं तथा भाजपा ने उन्हें पाटन सीट से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ उतारा है। विजय रिश्ते में भूपेश के भतीजे लगते हैं। सीएम के खिलाफ चुनाव लड़ रहे विजय बघेल का नाम भी मुख्यमंत्री की रेस में सम्मिलित माना जा रहा है, बशर्ते वह भूपेश को चुनाव मैदान में शिकस्त दे दें।
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छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री के लिए सरोज पांडेय का नाम भी दौड़ में सम्मिलित माना जा रहा है। सरोज पांडेय भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा राज्यसभा सांसद हैं। सरोज छत्तीसगढ़ में भाजपा का बड़ा चेहरा मानी जाती हैं। वह दो बार भिलाई की मेयर तथा विधायक भी रही है। सरोज 2009 के आम चुनाव में भाजपा के टिकट पर लोकसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं। हालांकि, 2014 की मोदी लहर में भी वह इस सीट से चुनाव हार गई थीं। वह भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
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बृजमोहन अग्रवाल रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट से सात बार के MLA हैं। इस बार वह आठवीं बार विधानसभा पहुंचने के लिए जोर लगा रहे हैं। बृजमोहन अग्रवाल, डॉक्टर रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। बृजमोहन को रायपुर दक्षिण सीट को भाजपा के अभेद्य किले में तब्दील करने के लिए श्रेय दिया ही जाता है, इनकी गिनती स्वच्छ छवि के सरल-सहज नेताओं में भी होती है।
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छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य राज्य है तथा डॉक्टर रेणुका सिंह इसी समाज से आती हैं। केंद्र सरकार में राज्यमंत्री रेणुका 2003 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुई थीं। भाजपा ने इस बार रेणुका को भरतपुर सोनहत सीट से चुनाव मैदान में उतारा है तथा चर्चा है कि पार्टी इन्हें सीएम बना सकती है। रेणुका सिंह जिला पंचायत सदस्य भी रही हैं तथा छत्तीसगढ़ भाजपा की महिला मोर्चा में महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुकी हैं। उन्हें संगठन में काम करने का भी अनुभव है।








