Chhattisgarh: डॉ. हिमांशु खुटिया कटघोरा के लिए बड़ी उपलब्धि, अभी तक कर चुके हैं 500 से ज्यादा सफल सर्जरी, लोग बता रहे इन्हें वर्ड लेवल के डॉक्टर, पढ़े पूरी खबर…

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रिपोर्टर:-अरविंद शर्मा

कोरबा/कटघोरा: भगवान के बाद डॉक्टर को दूसरा माना गया है ऐसा इसलिए है क्योंकि डॉक्टर हमारी बीमारियों का इलाज कर हमें नया जीवन प्रदान करते हैं। डॉक्टर भले ही भगवान न हो, लेकिन वह इंसान की जिंदगी बचाने हर तरह की कोशिश करते हैं। डॉक्टर मरे हुए व्यक्ति को फिर से जीवित तो नही कर सकते लेकिन वह रोगी को कठिन परिस्थितियों से बाहर जरूर निकाल सकते है। लिहाजा मानव समाज में डॉक्टर्स की बहुत बड़ी भूमिका होती है।

मानव जीवन मे कही ना कही मनुष्य को डॉक्टर की जरूरत पड़ती ही है, फिर चाहे बीमारी छोटी हो या गम्भीर बिना डॉक्टर के उनका समाधान संभव नहीं होता है।आज देश मे मेडिकल सुविधा इतनी कारगर हो चुकी है कि बड़ी से बड़ी सर्जरी संभव हो रही है,जिनके पीछे देश के प्रख्यात डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

ऐसी ही एक शख्सियत से हम आपको रूबरू करवाते हैं जिन्होंने कई लोगों को नया जीवन प्रदान किया है, असंभव चीजो को संभव कर दिखाया है,कई गम्भीर बीमारियों व जटिल से जटिल सर्जरी पर सफलता हासिल की है,इनकी कड़ी मेहनत व रोगियों को ठीक करने का जज्बा ही इन्हें आज इतना मशहूर कर दिया है कि लोग इन्हें वर्ड लेवल का डॉक्टर बताने लगे हैं, जी हां, हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के जिला कोरबा अंतर्गत कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ आर्थो सर्जन डॉ. हिमांशु खुटिया की,जो पिछले 12 महीनों से कटघोरा के सरकारी अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, आपको बता दे कि डॉ. हिमांशु खुटिया हड्डी रोग विशेषज्ञ है और मरीजो को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने प्रयासरत हैं।

इन्होंने अभी तक 500 से ज्यादा सफल सर्जरी की है जिनमे से कुछ सर्जरी तो इतनी जटिल थी की मानो उन पर सफलता हासिल करना किसी चुनोती से कम नहीं था, लेकिन डॉ हिमांशु के जज्बे इतने बुलंद थे कि उन जटिल सर्जरी पर भी सफलता हासिल कर दिखाए है। इनकी पदस्थापना बाद से कटघोरा सरकारी अस्पताल में रोगियों का तांता लगा रहता है रोजाना 100-150 मरीज ओपीडी पहुँचते है जहां डॉ हिमांशु सभी को समय देते हैं और उचित परामर्श प्रदान करते हैं।

डॉ. हिमांशु खुटिया मेडिकल साइंस में वो नाम है जिन्होंने कई असंभव चीजों को सम्भव कर दिखाया है।जिनके आगे हड्डियों से सम्बंधित बीमारियां घुटने टेक देती हैं,ऐसा माना जाता है अगर मरीज इनके पास पहुच गया तो वह सुरक्षित है और उसके ठीक होने के पूर्ण आसार हैं।इन्होंने जटिल से जटिल बीमारियों पर सफलता हासिल की है।इनका ईलाज इतना सफल माना जाता है कि मल्टीस्पेसलिटी हॉस्पिटल से निराश रोगी भी इनसे ईलाज हासिल कर नया जीवन प्राप्त चुके हैं।इतना ही नही दूसरे राज्यो से भी हताश मरीज इनकी गाथा सुनकर इनसे ईलाज प्राप्त कर जल्द स्वस्थ हो रहे हैं।

डॉ. हिमांशु खुटिया अपनी काबिलियत व मेहनत से मरीजो को बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुके हैं और लोगो के बीच एक सफल डॉक्टर बनकर उभरे हैं।इनकी लोकप्रियता कटघोरा में ही नही वरन दिल्ली में भी इतनी है कि जिसकी व्याख्या करना संभव नही है।

इन्होंने देश की राजधानी दिल्ली में ऐसे कारनामे कर दिखाए है जहां आज भी इनके बेसुमार चर्चे है, वहां के लोग इनकी कमी आज भी महसूस करते हैं।चलिए दिल्ली के सरकारी अस्पताल स्वामी दयानंद शहदरा के एक मरीज की कहानी से आपको अवगत कराते हैं जो कि एक ऐसा मरीज था जो अपनी बीमारी और दर्द से इतना व्यथित हो चुका था कि डॉक्टर से पॉइजन की मांग तक कर देता था।

अब आप भी सोच सकते हैं कि अगर मरीज डॉक्टर से पॉइजन की मांग करे तो मरीज किस हद तक दर्द से गुजर रहा होगा उसने अपनी बीमारी के चलते कितनी पीड़ा सही होगी,जो डॉक्टर्स से सीधे पॉइजन की मांग कर देता है।दरअसल गाजियाबाद निवासी मो.शाहनवाज एक निजी लैब में ब्लड कलेक्शन का कार्य करता है जिनका स्वामी दयानंद अस्पताल में आना जाना लगा रहता है, पिछले तीन चार सालों से शाहनवाज को पीठ में दर्द होने की शिकायत थी।

जहां वह दर्द होने पर पेनकिलर लेकर राहत प्राप्त कर लेता था, यह शिलशिला कुछ साल तक चला, लेकिन शाहनवाज के जीवन में एक दिन ऐसा भी आया कि उसे पीठ दर्द का ऐसा झटका लगा कि वह फिर दुबारा खड़ा नही हो पाया और बिस्तर पकड़ लिया, इस बीच इन्होंने स्वामी दयानंद अस्पताल के डॉक्टर्स से मुलाकात की जहाँ अस्पताल के डॉक्टर्स ने शाहनवाज को स्वामी दयानंद अस्पताल में पोस्टेड आर्थो स्पेसलिस्ट डॉ. हिमांशु खुटिया से मिलने की सलाह दी, जहां उसने बिना देर किए डॉ. हिमांशु से मुलाकात की, जहां शाहनवाज की जांच की गई, जांच में कुछ चोकाने वाले खुलासे हुए, जहां डॉ. हिमांशु ने बताया कि अगर थोड़ी सी भी देरी हो जाती तो हमेशा के लिए बेड रेस्ट हो जाता, दरअसल शाहनवाज को एक ऐसी बीमारी हो गई थी जिसमे रीढ़ की हड्डी का गलना शुरू हो जाता है, जिसे मेडिकल साइंस में Spine tuberculosis =potts spine कहा जाता है और यह एक गम्भीर बीमारी है।

हालांकि मेडिकल साइंस मर इसका उपचार सम्भव है अब मानव शरीर हड्डियों पर ही टिका होता है जिसमे सबसे खास रीढ़ की हड्डी होती है जिस पर पूरा शरीर निर्भर होता है अगर रीढ़ की हड्डी में प्रॉब्लम आई तो मनुष्य खड़ा नही हो सकता।शाहनवाज की रीढ़ की हड्डी गलनी शुरू हो गई थी,इस दौरान यह समझ नही पाया कि इसे गम्भीर बीमारी जकड़ने वाली है जब भी इसे दर्द होता था यह पेनकिलर खाकर राहत महसूस कर लेता था।

शाहनवाज अपने परिवार में इकलौता कमाने वाला था लिहाजा शाहनवाज पर परिवार के जिम्मेदारी का बोझ था,इनके साथ कुछ अनहोती होती तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता,लेकिन कहावत है “जाको राखे साइया, मार सके न कोय” कहने का तात्पर्य यह है कि जहां डॉ. हिमांशु खुटिया जैसे डॉक्टर मौजूद हो वहाँ भला बीमारियां मानव का क्या बिगाड़ लेंगी,,डॉ. हिमांशु ने तुरंत शाहनवाज का ईलाज शुरू किया जहां प्राथमिक तौर पर दवाइया लेने की बात कही और ठीक होने में साल डेढ़ साल का समय लगेगा,नियमित चेकअप और लंबे समय तक चले दवाइयों के शीलशीले ने शाहनवाज के जीवन मे नया मोड़ लाया और वह स्वस्थ होने लगा,और धीरे धीरे समय बिता और दो साल के भीतर शाहनवाज पहले की तरह अपने कार्यो में लीन हो गया अब शाहनवाज को न दर्द की शिकायत है और नही ही उसे काम करने में कोई दिक्कत होती है वह पूर्ण रूप से आज स्वस्थ हो चुका है।शाहनवाज ने ठीक होते ही डॉ. हिमांशु को वर्ड लेवल के डॉक्टर की उपाधि देकर उनका आभार व्यक्त किया।

यू तो देश व राज्य में अनेकों डॉक्टर्स मौजूद हैं जो दिनरात लोगो की सेवा में लगे हैं और लोगो को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने लगे हैं। फिर चाहे अस्पताल सरकारी हो या प्राइवेट, डॉक्टर्स मरीजो के स्वास्थ्य को लेकर कोई समझौता नही करते बल्कि मरीजो को बेहतर स्वास्थ्य चिकित्सा उपलब्ध कराते हैं।लेकिन लोगो की धारणा कई बार देखी जाती है कि वे सरकारी अस्पतालो पर ज्यादा भरोसा नही करते बल्कि प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर लेते हैं जहां उन्हें प्राइवेट अस्पतालो के मोटे खर्चो से गुजरना पड़ता है।बहरहाल देखा जाए तो लोगो की यह धारणा किसी से छुपी नही है।

दरअसल छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ो की लागत से बने सरकारी अस्पतालों में बीमारियों से सम्बंधित उपकरण व डॉक्टर्स की पर्याप्त नियुक्ति नही हो पाती है जिस कारण मरीजो को सरकारी अस्पतालो में अक्सर रिफर जैसे हालातो से गुजरना पड़ता है।मौजूदा सरकार ने पहली मर्तबा कटघोरा के सरकारी अस्पताल में डॉ. हिमांशु खुटिया जैसे सर्जन को प्रमोट किया है जो कटघोरा वासियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हुई है अब लोगो को यहाँ बेहतर इलाज मुहैया हो रहा है, लोगो को अब आर्थो सम्बंधित बीमारियों के ईलाज हेतु दर दर भटकना नही पड़ता है,बल्कि अस्पताल में ही उनका बेहतर ईलाज संभव हो रहा है।

गौरतलब है कि कटघोरा नेशनल हाइवे जैसे मार्गो से घिरा हुआ है जहां सड़क हादसों में एकाएक बेतहाशा इजाफा हुआ है,जहां आएदिन सड़क हादसों में घायल मरीज कटघोरा अस्पताल पहुँचते है,कभी कभी तो हादसे इतने भयावह होते हैं कि घायलों की संख्या बड़ी तादात में होती है जिनमे से कई मामले तो बेहद क्रिटीकल भी होते हैं जिन्हें रिफर तक करना पड़ जाता है।कटघोरा का यह बड़ा दुर्भाग्य भी रहा है कि यहां क्रिटीकल सेंटर नही होने के कारण सड़क हादसों में गम्भीर रूप से घायलों को कई बार अपनी जान गवानी पड़ जाती है,अगर क्रिटीकल सेंटर जैसी सुविधा कटघोरा में शुरू हो जाये तो गम्भीर मामलों में भी लोगो की जान काफी हद तक बचाई जा सकती है उन्हें रेफर जैसे हालातो से नही गुजरना पड़ेगा। हालांकि डॉ. हिमांशु की पदस्थापना बाद से रिफर केश बहुत कम देखने को मिल रहे हैं।

सरकारी अस्पताल में मरीजो को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले उसके लिए डॉ हिमांशु ने सरकार से Arm and Operation Theater व अन्य आवश्यक उपकरणों की मांग की थी जिस पर सरकार ने जल्द ही सभी मांगो को पूरा किया है,अब मरीजो का ऑपरेशन अस्पताल में ही संभव हो रहा है।सरकार कटघोरा अस्पताल में ट्रामा सेंटर जैसी सुविधा उपलब्ध करा दे तो यह कटघोरा वासियों सहित आसपास के इलाकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी जहां लोगो को काफी हद चिकित्सा सुविधा मिल पाएगी और लोगो को ईलाज हेतु दर दर भटकने से निजात मिल सकेगा।

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