BIG NEWS: पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टर्नबुल ने मोदी को एक प्रेरक नेता बताया

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ऑस्ट्रेलियाई के पूर्व प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने ऑस्ट्रेलियाई-भारत की मित्रता को 10 में से 10 अंक दिए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक प्रेरक नेता बताया जो ‘‘बहुत बड़ा बदलाव ला रहे हैं।’’ टर्नबुल की 2017 में भारत की पहली यात्रा के दौरान आयी कई तस्वीरों में दोनों नेताओं के बीच नजदीकी दिखायी दी थी। उसके बाद वह सेवानिवृत्त हो गए और अब अपनी पत्नी के साथ भारत की यात्रा कर रहे हैं।

जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएफ) के 17वें संस्करण के वक्ताओ में से एक टर्नबुल ने 2017 में भारत की अपनी ‘‘खूबसूरत यात्रा’’ और प्रधानमंत्री मोदी के साथ बिताए वक्त को याद किया। टर्नबुल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मेरी यहां की यात्रा बहुत अच्छी रही थी। मैं हाल में हमारे पुराने मित्र ंिशजो आबे के अंतिम संस्कार में जापान में उनसे (मोदी) मिला था…मैंने श्रीमान मोदी के साथ भरपूर आनंद लिया। मैं जानता हूं कि वह स्वाभाविक रूप से अपने देश में एक विवादास्पद नेता हैं। लेकिन बाहर से देखने पर वह एक प्रेरक नेता हैं और साफ तौर पर वह बड़ा बदलाव ला रहे हैं।’’

आॅस्ट्रेलिया के 29वें प्रधानमंत्री रहे टर्नबुल ने कहा कि दोनों देशों में कई चीजें एक समान हैं जैसे कि क्रिकेट के लिए प्यार, कानून का शासन और लोकतंत्र तथा उनकी मित्रता को 10 में से 10 अंक दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक समस्या है कि ‘‘हमारे बीच पर्याप्त व्यापार नहीं है।’’

टर्नबुल ने कहा, ‘‘जब हम पहली बार मिले थे तो मोदी ने कहा था ‘आपने अपने जीवन में बहुत सारा अंतरराष्ट्रीय व्यापार किया है, आपने चीन के साथ काफी व्यापार किया है, आपने भारत के साथ इतना कम व्यापार क्यों किया है?’ मैंने कहा, ‘‘सच कहूं तो, भारत में किसी विदेशी निवेशक के लिए व्यापार करना काफी मुश्किल है और उन्होंने इसे माना।’’

उन्होंने कहा कि यह ‘‘विचित्र’’ है कि कम्युनिस्ट देश चीन के साथ निवेश करना भारत के बजाय आसान है जबकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। उन्होंने कहा, ‘‘सीमित एफटीए (मुक्त व्यापार समझौते) से हमारे व्यापारिक संबंधों में सुधार आया है लेकिन अभी हमें लंबा रास्ता तय करना है।’’ टर्नबुल ने अपनी आत्मकथा ‘‘ए बिगर पिक्चर’’ के बारे में भी बात की जिसमें एक पत्रकार, बैंकर, वकील, कारोबारी, आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के रूप में उनके जीवन का उल्लेख है।

उनका गुजरात, वाराणसी, आगरा और दिल्ली जाने का भी कार्यक्रम है। यह पूछने पर कि क्या उनकी अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी से भी मिलने की योजना है, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री की कितनी जिम्मेदारी होती है, उन्हें देश चलाना होता है।’’ ‘विश्व का सबसे बड़ा साहित्य उत्सव’ कहे जाने वाले पांच-दिवसीय जेएलएफ में इस बार विश्व के कुछ सर्वश्रेष्ठ विचारक, लेखक और वक्ता भाग ले रहे हैं।

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