Chhattisgarh: ग्राम मुंदेरा के लगभग दो दर्जन ग्रामीण अपने घरों में टुल्लू पंप से खींच रहे थे पानी, पंचायत ने दी समझाइश

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बालोद: आपको बता दें कि ग्राम मुंदेरा में दर्जनभर ग्रामीण टुल्लू पंप से अपने घरों में पानी खीच रहे थे। जिसके चलते सैकड़ो ग्रामीण परेशान थे। इस मामले को लेकर CG BALOD EXPRESS व CLIPPER 28 NEWS ने ख़बर प्रकाशन कर शासन प्रशासन को ध्यानाकर्षण कराया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशानुसार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी अश्वन कुमार पुसाम जनपद पंचायत गुण्डरदेही द्वारा टीम बनाकर ग्राम पंचायत मुन्देरा में नल कनेक्शन धारियों द्वारा मोटर पम्प (टुल्लू पम्प) के अवैध उपयोग की जॉच की गई।

इस दौरान जनपद पंचायत गुण्डरदेही से महेन्द्र कुमार जांगड़े सहायक विकास विस्तार अधिकारी व चेतनलाल मारकण्डे सहायक आंतरिक लेखा परीक्षण/करारोपण अधिकारी तथा ग्राम पंचायत मुन्देरा से सरपंच , सचिव, पंचगण, ग्रामीणों का संयुक्त दल गठित कर जॉच किया गया।

जॉच दल द्वारा घर-घर जा कर देखने पर 22 घरों में मोटर पम्प (टुल्लू पम्प) का अवैघ उपयोग करते पाया गया। जिसे जॉच दल व ग्राम पंचायत द्वारा ऐसे लोगो को समझाईस दी गई व मोटर पम्प (टुल्लू पम्प) को तत्काल निकालने का निर्देश दिया गया। साथ ही भविष्य में इस गलती को न दोहराने का शपथ-पत्र लिया गया व पंचनामा बनाया गया। सरपंच कमलेश साहू ने बताया की अब आगे भी पंचगण, महिला स्व सहायता समूह व ग्रामीणों का टीम बनाकर सभी वार्डो मे घर-घर जाकर सतत निगरानी व कार्यवाही की जायेगी।

इस कार्यवाही के बाद समस्त ग्राम वासियों ने युवा सरपंच कमलेश साहू की काफी सराहना की। और कहा कि गांव में काफी लंबे समय से इस समस्या को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों को शिकायत कर चुके थे परंतु किसी ने ध्यान नहीं दिया। वही गांव के युवा सरपंच कमलेश साहू ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से निजात दिलाया।

*यह है पूरा मामला*

दरअसल ग्राम मुंदेरा के लगभग दो दर्जन ग्रामीण अपने घरों में अधिक मात्रा में पानी भरने के लिए टुल्लू पंप लगा कर रखे थे। टुल्लू पंप लगाने वाले ग्रामीणों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल रहा था। परंतु कनेक्शन लिए अन्य ग्रामीणों को पीने के लिए पानी भी नहीं मिल रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सुबह एक घंटा एवं शाम को एक घंटा नल कनेक्शन से पानी दिया जाता है जिसमे मुश्किल से 5 से 10 मिनट ही चल रहा है। इस दौरान ग्रामीण पीने तक का पानी भी नहीं भर पाते थे। और उन्हें हैंडपंप से पानी भरना पड़ रहा था।

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