रविवार, मई 22, 2022

कोयला संकट: भारतीय रेलवे का बड़ा कदम, 24 मई तक पैसेंजर ट्रेनों के 670 फेरे किए रद्द

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नई दिल्ली: देशभर में बिजली की मांग में भारी वृद्धि की वजह से कोयले की आवश्यकता भी बढ़ गई है, जिसके चलते पिछले कुछ हफ्तों में रोजाना तकरीबन 16 मेल/एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को रेलवे को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, ताकि अलग-अलग जगहों पर स्थित बिजली संयंत्रों के लिए कोयला ढोने वाली ट्रेनों को अतिरिक्त रास्ता मिल सके। अब रेल मंत्रालय ने 24 मई तक यात्री ट्रेनों की करीब 670 फेरों को रद्द करने की अधिसूचना जारी की है जिसमें से 500 से अधिक लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें हैं।

रेलवे ने कोयले की रैक (ट्रेन) की औसत दैनिक लोडिंग 400 से ज्यादा बढ़ा दी है, जो पिछले 5 वर्षों में सबसे अधिक है। मीडिया सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि भारतीय रेल ने मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए रोजाना 415 रैक मुहैया कराने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई है। प्रत्येक रैक में तकरीबन 3,500 टन कोयला ढोया जा सकता है। बताया जा रहा है कि बिजली संयंत्रों में स्टॉक में सुधार और जुलाई-अगस्त में किसी भी संकट से बचने के लिए यह कवायद कम से कम दो महीने तक जारी रहेगी। बारिश शुरू होने पर अगर कोयला खनन में कमी आती है तो स्थिति पर फिर से विचार किया जाएगा।

वहीं दूसरी तरफ यात्री ट्रेनों के रद्द होने के कारण विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इस मुद्दे पर रेल मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि परिस्थिति बेहद कठिन है। हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि फौरन बिजली संयंत्रों को कोयला नहीं पहुंचाया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बिजली संयंत्रों को कोयले की कमी न हो और कोई ब्लैक आउट न हो।

अधिकारी ने आगे कहा कि दरअसल बिजली संयंत्र देश के अलग-अलग जगहों पर स्थित हैं, लिहाजा रेलवे को लंबी दूरी की ट्रेन चलानी पड़ती है और कोयला रेक को अपनी यात्रा पूरी करने में तीन से चार दिन का समय लगता है। घरेलू कोयले का एक बड़ा हिस्सा पूर्वी क्षेत्र से भारत के उत्तरी, मध्य और पश्चिमी भागों में ले जाया जाता है। उम्मीद है कि हम इस अस्थायी संकट से जल्द ही उबर जाएंगे।

देश की लगभग 70% बिजली पैदा करने के लिए कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। कोयले के लदान और परिवहन को बढ़ाने के लिए रेलवे ने कई कदम उठाए हैं, जिसमें भारतीय रेलवे और फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क (दोनों ही पर लंबी दूरी की ट्रेनें चलाना), लोडिंग और अनलोडिंग प्वाइंट्स पर सभी कोयला रेक के अवरोधन की गहन निगरानी शामिल है।

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