नई दिल्ली: कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व परिवर्तन के बाद संगठन के संचालन में गांधी परिवार की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में चाहे अटकलों का बाजार जारी हो मगर राहुल गांधी ने दो टूक कह दिया है कि वे कांग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कामकाज में किसी तरह का कोई दखल नहीं देंगे। पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार राहुल ने खुद मल्लिकार्जुन खड़गे से सीधे शब्दों में संगठन के मामलों में अपनी तरफ से किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करने की बात कही है। इसका साफ संदेश देने के लिए राहुल ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से निजी मुलाकात करने से भी परहेज किया है।
समझा जाता है कि कांग्रेस के नए अध्यक्ष के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करने के अपने इस रुख के जरिये राहुल ने खड़गे को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि संगठनात्मक और नीतिगत मामलों में पार्टी हित में फैसले करने की उन्हें पूरी आजादी है। सूत्रों के अनुसार राहुल ने खड़गे से यह बात उनके अध्यक्ष पद की कुर्सी संभालने के तत्काल बाद हुई आपसी बातचीत में कही।
खड़गे के कांग्रेस अध्यक्ष का उम्मीदवार बनने के साथ ही गांधी परिवार से उनकी निकटता के चलते राजनीतिक गलियारों में उनके ताकतवर होने को लेकर संदेह के सवाल उठाए जाने लगे थे। भाजपा ने तो यहां तक कहा था कि खड़गे रबर स्टांप अध्यक्ष होंगे और कांग्रेस संगठन की असली ताकत गांधी परिवार के हाथों में ही रहेगी।








