विश्व होम्योपैथी दिवस: सस्ती और सुलभ चिकित्सा पद्धति, लोगों का बढ़ा भरोसा

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विश्व होम्योपैथी दिवस: दुनियाभर में 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। होम्योपैथी इलाज के प्रति जागरूकता को बढ़ाने के लिए हर वर्ष भारत सरकार एक थीम जारी करती है। यह एक लक्ष्य की तरह से काम करती है।

इसके माध्यम से लोगों को होम्योपैथी से इलाज और इसके महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है। वर्ष 2022 की थीम “होम्योपैथी : स्वास्थ्य के लिए लोगों की पसंद” रखी गई है।

होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली, होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 के तहत भारत में मान्यता प्राप्त चिकित्सा प्रणाली है। इसे दवाओं की राष्ट्रीय प्रणाली के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

विश्व होम्योपैथी दिवस:

यह दिन जर्मन चिकित्सक डॉ क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है, जो होम्योपैथी के संस्थापक हैं। डॉ हैनीमैन एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भाषाविद थे।

उनका जन्म 10 अप्रैल 1755 को पेरिस में हुआ था। उन्होंने होम्योपैथी के उपयोग के माध्यम से लोगों को स्वस्थ करने के कई तरीके खोजे और विश्व को होम्योपैथी के रूप में बेहद कारगर, सस्ती और सुलभ वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति दी है।

विश्व होम्योपैथी दिवस:भारत में होम्योपैथी

होम्योपैथी भारत में लोकप्रिय चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। भारत में होम्योपैथी का इतिहास एक फ्रांसीसी डॉ. होनिगबर्गर के नाम से जुड़ा हुआ है, जो भारत में होम्योपैथी लाए थे।

वह महाराजा रणजीत सिंह के दरबार से जुड़े थे। वह 1829-1830 में लाहौर पहुंचे और बाद में उन्हें पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के इलाज के लिए आमंत्रित किया गया।

डॉ होनिगबर्गर बाद में कलकत्ता गए और वहां अभ्यास शुरू किया, जहां उन्हें मुख्य रूप से ‘कॉलरा डॉक्टर’ के नाम से जाना जाता था। होम्योपैथी की शुरुआत 19 वीं शताब्दी में भारत में हुई थी। यह पहले बंगाल में फला-फूला, और फिर पूरे भारत में फैल गया।

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