कवर्धा, 19 मार्च 2026 : कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के सहयोग से “मधुमक्खी पालन पर सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम” का शुभारंभ 18 मार्च 2026 को किया गया। यह प्रशिक्षण 18 से 24 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में कबीरधाम जिले के विभिन्न ग्रामों पोलमी, बोड़ला, कुकदुर, भंगीटोला एवं लखनपुर से कुल 28 प्रशिक्षणार्थी को सात दिनों तक कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
यह कार्यक्रम डॉ. वी.के. त्रिपाठी, संचालक अनुसंधान सेवाएं एवं डॉ. एस.एस. टुटेजा, निदेशक विस्तार सेवाएं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के निर्देशन तथा कृषि विज्ञान केन्द्र, कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.पी. त्रिपाठी के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद सदस्य शिवकुमार धुर्वे एवं डॉ. बी.पी. त्रिपाठी की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
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इस अवसर पर डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने प्रशिक्षण की रूपरेखा बताते हुए कहा कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक सशक्त माध्यम है तथा कबीरधाम जिले में इसके विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। जनपद सदस्य शिवकुमार धुर्वे ने अपने उद्बोधन में किसानों को मधुमक्खी पालन अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए इसे स्वरोजगार का प्रभावी साधन बताया।
कार्यक्रम के सह-समन्वयक डॉ. सी.पी. रहांगडाले ने मधुमक्खी पालन की मूलभूत जानकारी, प्रबंधन एवं आवश्यक तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। प्रथम दिवस के तकनीकी सत्र में डॉ. बी.पी. त्रिपाठी ने मधुमक्खियों के प्रकार, उनकी उपयोगिता तथा जिले में मधुमक्खी पालन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
डॉ. सी.पी. रहांगडाले ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन की जानकारी दी, वहीं डॉ. एन.सी. बंजारा ने उद्यानिकी फसलों के साथ मधुमक्खी पालन के समन्वय के लाभों को समझाया। इस अवसर पर केवीके के वैज्ञानिक डॉ. बी.एस. परिहार, इंजीनियर टी.एस. सोनवानी एवं योगेश कुमार कौशिक भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को व्याख्यान, प्रायोगिक अभ्यास एवं प्रक्षेत्र भ्रमण के माध्यम से मधुमक्खी पालन की संपूर्ण जानकारी दी जाएगी, ताकि वे इस तकनीक को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।








