रायपुर, 10 अगस्त 2026 : सीमेंट से बनने वाली ईंटों की डिमांड सरकारी से लेकर प्राइवेट सेक्टर में बहुत ज्यादा बढ़ गई है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस बिजनेस को शुरू करने के लिए सरकार खुद 25 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद और भारी सब्सिडी दे रही है।
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूर्व में नक्सल प्रभावित ग्राम एर्राबोर की सोयम समसाद ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) की मदद से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। कभी परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली समसाद आज सीमेंट ईंट निर्माण का सफल व्यवसाय चला रही हैं। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने ‘लखपति दीदी’ का दर्जा हासिल किया है।
सुकमा जैसे दूरस्थ और संवेदनशील जिले में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की यह प्रेरक कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी अपनी पहचान बना सकती हैं। सुकमा जिले में वर्तमान में 7,553 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
समूह से जुड़कर मिली आत्मनिर्भरता की राह
वर्ष 2021 में समसाद बिहान योजना के ‘प्रयास समूह’ से जुड़ीं। समूह की बैठकों, बचत और ऋण व्यवस्था की जानकारी से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा। समूह को मिली चक्रीय निधि और सामुदायिक निवेश निधि से प्राप्त 60 हजार रुपये की सहायता से उन्होंने वर्ष 2023 में हाथ से सीमेंट ईंट बनाने का काम शुरू किया। शुरुआत में नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सीमित मांग और अन्य कठिनाइयों के कारण कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
बैंक ऋण और मशीन से बढ़ा कारोबार
वर्ष 2025-26 में समसाद ने मशीन से सीमेंट ईंट निर्माण शुरू करने का निर्णय लिया। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और विभागीय अभिसरण के माध्यम से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत ग्रामीण बैंक, दोरनापाल से 5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। ऋण मिलने के बाद उन्होंने मशीन आधारित ईंट निर्माण शुरू किया।
उनकी बनाई ईंटों का उपयोग पंचायतों में आवास निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों में किया जा रहा है। इससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 8 से 10 हजार रुपये की आय होने लगी। इसके अलावा वनोपज संग्रहण और कृषि आधारित गतिविधियों से 5 से 7 हजार रुपये प्रतिमाह की अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है।
कई आजीविका स्रोतों से बनीं ‘लखपति दीदी’
समसाद ने इस वित्तीय वर्ष में 32 क्विंटल इमली की खरीद भी की, जिससे उन्हें सीजन में 10 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी हुई। विभिन्न आजीविका गतिविधियों से उनकी कुल वार्षिक आय 1,50,468 रुपये तक पहुंच गई है। इसी उपलब्धि के आधार पर वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल हुई हैं। मुख्यमंत्री ने जिले के प्रवास के दौरान उन्हें चेक प्रदान कर सम्मानित और प्रोत्साहित किया, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ा।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
सोयम समसाद की सफलता आज सुकमा की हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। वे कहती हैं कि सही मार्गदर्शन, समूह की ताकत और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाए तो गांव की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज की तस्वीर बदल सकती हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त किया है।








