दिव्यांग के पिता को दबंगों ने पिट पिटकर विकलांग बनाया

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दिव्यांग के पिता को दबंगों ने पिट पिट कर विकलांग बनाया

बालोद ब्यूरो चीफ ढालेंद्र कुमार

बालोद : जिला में मुख्य प्रशासनिक नौकरशाह के तौर पर पदस्थ कलेक्टर बाबू बिते दिनों दिव्यांग साथीयों के संग जमीन पर बैठे हुए दिखाई दिए। बताया जाता है कि इस अदभुत नजारे को जिला संयुक्त कार्यालय में मौजूद अधिकारीगण और कर्मचारीगण से लेकर सरकारी कामकाज से जुड़े हुए आने जाने वाले लोग और कुछ मिडिया कर्मी ने भी अपने खुले आंखों से देख रखा है।

दिव्यांग के पिता को दबंगों ने पिट पिट कर विकलांग बनाया

हालांकि इसमें हैरान होने वाली कोई बात नहीं है बल्कि यह एक बढ़िया संदेश है। शायद इसलिए अगली सुबह कलेक्टर साहब की जमीन पर दिव्यांगो के साथ बैठने की खबर ने अखबारों की सुर्खियों में चार चांद लगा दिया। अखबारों में छपी इस खबर को पढ़ कर यह बिलकुल ना समझे की जिला में मौजूद हमारे दिव्यांग साथीयों की जीवन सरीखा आनंद मंगल से गुजर रही है।

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सरकारी बाबू लोग आजकल भला-बुरा का भेद रखते हैं। इसलिए उन्हें हमारी बातों की असल सच्चाई पता है। यह सत्य है कि थोड़ी बहुत मानवता और इंसानियत आज के वर्तमान दौर में भी लगभग हर इंसान में पाई जाती है।

अतः इस मसले को नैतिक की ज़िम्मेवारी से भी जोड़ कर देखा जाना चाहिए था साथ ही जिला कलेक्टर साहब को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिला में निवासरत कोई भी दिव्यांग भाई, बहन,बेटा, बेटी हो उन्हें किसी भी प्रकार की कोई भी तकलीफ या असुविधा ना हो जिला प्रशासन उनके लिए सदैव तत्पर हैं। चूंकि जिला के अंदर ऐसे ना जाने कितने दिव्यांग बेटे, बेटी, भाई,बहन मौजूद है जिन्हें सिर्फ अपनी मौत का इंतजार है।

यानी कि सरकारी सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ नाम दिया गया है, वो भी दिव्यांग । यदि हम कुछ लोगों के दुख में शामिल होकर पूरे लोगों को खुश रखना चाहेंगे तो कतैई संभव नहीं हो सकता है। हर दिव्यांग की एक अपनी अलग जीवन और अलग पहचान के साथ अलग अलग समस्या है।

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समस्त मानव जाति की जिम्मेदारी है कि जो व्यक्ति शारीरिक रूप से सझम नहीं है। उन्हें समाज के सबसे आगे पायदान पर खड़ा रखे, ताकि उन्हें भी बराबरी का अहसास हो, लेकिन शारीरिक रूप से कमजोर दिव्यांग साथीयों की बराबरी और जमीन पर बैठकर उन्हें सम्मान देने वाले लोग एक दिव्यांग बेटे की पिता को विकलांग बनाने वाले लोगों को दबोचने में क्यों विलंब किया यह समझ से परे है।

दरअसल जिला की राजनीतिक रण क्षेत्र के नाम से मशहूर गुरूर विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत कवंर चौकी क्षेत्र की ग्राम पंचायत सांगली में विगत कुछ माह पहले नरोत्तम पटेल पिता शत्रुघ्न पटेल की गांव में कुछ युवकों ने बुरी तरह पिटाई कर दी। युवकों की पिटाई से नरोत्तम पटेल रात भर कलामंच में पड़ा राहा।

इस दौरान ग्राम पंचायत सांगली की सभ्य समाज इस घटनाक्रम पर मूंह छुपा कर चुप तमाशबीन बनी रही। सुबह नरोत्तम पटेल की पत्नी और पिता ने उठाकर हास्पिटल में एडमिट कराया। हास्पिटल में एडमिट करने पर डाक्टरों ने बताया कि पैर का हड्डी टूट गया है।

आपरेशन करना पड़ेगा आपरेशन होने से लेकर कुछ चल फिर सकने तक नरोत्तम पटेल हास्पिटल में एडमिट राहा। हास्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद नरोत्तम पटेल अपने साथ हुए घटनाक्रम की जानकारी देने हेतू पुलिस चौकी कवंर अपने पिता को भेजा दिया। पुलिस को जानकारी देने के बावजूद पुलिस मामले को लेकर किसी भी तरह की गंभीरता नहीं दिखाई।

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अंततः कार्यवाही में देर हो गई उपर से पिड़ित पहले से ही हास्पिटल में एडमिट राहा है। पिड़ित परिवार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लेकर गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू तक को मामले से संबंधित जानकारी और कार्यवाही करने हेतू निवेदन करते हुए देखे गए। आखिरकार सरकार की दबाव के चलते कवंर चौकी पुलिस मामले में एफआईआर दर्ज कर लिया है,

लेकिन इस बिच यह भी खबर है कि मामले में गांव के कुछ तथाकथित दंबगो ने कवंर चौकी में बैगर पिड़ित परिवार की उपस्थिति में एवं ग्राम प्रमुख सरपंच की मौजूदगी में पिड़ित पर दबाव बना कर 21000 हजार रुपए में समझौता कर लिया है।

हालांकि मामले में पुलिस ने अपनी ओर से मामला दर्ज करने की बात कह रही है,लेकिन मामले को लेकर पुलिस की भूमिका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। मामले में पिड़ित पक्ष समझौता से नाखुश हैं बताएं जा रहे है वंही दिव्यांग बेटे और दिव्यांग पिता के बाप नरोत्तम पटेल अपने स्वंय के इलाज में अपनी कृषि जमीन बेंच चुका है।

मामले में पिड़ित युवक नरोत्तम पटेल के पिता जी शत्रुघ्न पटेल संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र विधायक संगीता सिन्हा की खास परिचितों में से एक बताए जाते हैं। ऐसे में देखना यह है कि इस मामले में दिव्यांग बेटे के पिता नरोत्तम पटेल को विकलांग बनाने वाला कौन है जो कवंर चौकी में मामला को 21हजार रूपए में सलटा कर रफ्फूचक्कर होने की फिराक में लगा हुआ है।

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