MP : वेयरहाउस में रखा 29 हजार क्विंटल गेहूं-धान सड़ा… गोदाम में शिफ्टिंग के लिए लिखीं 45 चिटि्ठयां

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जबलपुर : मध्यप्रदेश के जबलपुर जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर की दूरी पर बसा है तिलसानी गांव। मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई काॅर्पोरेशन ने किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान खरीदी का केंद्र बनाया है, जबकि वेयरहाउसिंग काॅर्पोरेशन ने यहां किसानों से खरीदे गए गेहूं-धान को सुरक्षित रखने के लिए कैंप। जहां चार साल पहले 2019 में किसानों से खरीदे गए 14 हजार क्विंटल गेहूं और 16 हजार क्विंटल धान को मैदान में पॉली बैग से कवर करके अस्थाई रूप से रखा गया था। जिसे अगले 3 से 6 महीने के भीतर कवर्ड गोदाम में शिफ्ट किया जाना था।

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यहां रखे गेहूं और धान को सुरक्षित गोदाम में शिफ्ट करने के लिए कैंप के मैनेजर ने एक, दो बार नहीं, बल्कि 40 से ज्यादा बार मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई काॅर्पोरेशन के जिला प्रबंधक को चिट्ठी भी लिखी। लेकिन, गेहूं और धान गोदाम में शिफ्ट होने के बजाय कैंप के मैदान में रखे – रखे सड़ गया। आलम यह है कि अब यहां रखी गेहूं और धान में कीड़े पड़ गए हैं। यह खुलासा हुआ है तिलसानी कैंप में गेहूं और धान के सड़ने के कारणों की पड़ताल में।

मप्र वेयरहाउसिंग काॅर्पोरेशन और मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई काॅर्पोरेशन के अफसरों के मुताबिक तिलसानी कैंप में सड़े हुए गेहूं की कीमत करीब एक करोड़ और धान की कीमत 1.25 करोड़ रुपए है। अफसरों के मुताबिक किसानों को उनके द्वारा बेचे गए गेहूं और धान की कीमत का पेमेंट किया जा चुका है।

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तिलसानी कैंप में रखे – रखे खराब हुआ गेहूं पूरी तरह से घुन चुका है। गेहूं की बोरियों से घुन के साथ छोटे – छोटे कीड़े गिर रहे हैं, जबकि धान की बोरियों से इल्लियां गिर रही हैं। कैंप अफसरों के मुताबिक मैदान में रखा गेहूं और धान, अब खाने लायक नहीं बचा है। बारिश में भीगने से गेहूं और धान काला हो चुका है।

एमपी वेयर हाउस कार्पोरेशन के जबलपुर के तिलसानी कैंप में रखा 29 हजार क्विंटल गेहूं और धान सड़ कर खराब हो गया। इस गेहूं और धान को यहां 2019-20 में किसानों से खरीदकर रखा गया था। तभी से गेहूं और चावल खुले मैदान में रखा था। इसकी पुष्टि कार्पोरेशन के तिलसानी सेंटर के मैनेजर प्रदीप पटले ने की है।

कार्पोरेशन के जबलपुर में तिलसानी में बने कैंप के मैनेजर प्रदीप पटले ने बताया कि 14 हजार क्विवंटल गेहूं और 15 हजार क्विंटल धान खुले में रखा – रखा खराब हो गया है। इस गेहूं और धान को मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई काॅर्पोरेशन को कैंप से उठवाकर सुरक्षित रखवाना था। लेकिन, कार्पोरेशन के अफसरों ने कैंप के खुले मैदान में रखे गेहूं और धान को साढ़े तीन साल बाद भी नहीं उठाया है।

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गेहूं और धान को कैंप से उठाकर सुरक्षित रखवाने के लिए मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के डिस्ट्रिक मैनेजर को 45 से ज्यादा चिट्‌ठियां लिख चुका हूं। लेकिन, सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के मैनेजर ने अब तक गेहूं और धान को कैंप से उठाने की प्रक्रिया पूरी नहीं की है।

मैनेजर प्रदीप पटले के मुताबिक कैंप में रखे 15 हजार क्विंटल सड़े हुए धान की नीलामी की कार्रवाई मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन ने पूरी कर ली है। ठेकेदार ने कैंप में रखे सड़े हुए धान को हाल ही में उठाना शुरू कर दिया है। लेकिन, सड़े हुए गेहूं को हटाने के लिए नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। यह नीलामी मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन को करना है।

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वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के डिस्ट्रिक मैनेजर सखाराम निमोदा ने बताया कि तिलसानी कैंप में बड़ी मात्रा में सड़ा हुआ गेहूं और धान रखे होने की जानकारी मिली है। लेकिन, इस मामले में शनिवार को कैंप का इंस्पेक्शन करने के बाद ही कुछ बता सकूंगा। कैंप में रखा 29 हजार क्विंटल गेहूं और धान के खराब होने के लिए कौन जिम्मेदार है? के बारे में कैंप और उसके रिकार्ड का शनिवार को निरीक्षण करूंगा। इसके बाद ही इस मामले में अफसर और एजेंसी की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

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