Study: आदिमानव का बड़ा दिमाग भोजन खोजने के लिए नहीं था

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ऑकलैंड: हमारे बड़े दिमाग के कारण, मानव और गैर-मानव वानर अधिकांश स्तनधारियों की तुलना में अधिक चालाक हैं। लेकिन कुछ प्रजातियों में सबसे पहले बड़े मस्तिष्क का विकास क्यों होता है? नरवानर के बड़े मस्तिष्क कैसे विकसित हुए, इसके लिए अग्रणी परिकल्पना में एक फीडबैक लूप शामिल है: होशियार जानवर भोजन को अधिक कुशलता से खोजने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अधिक कैलोरी मिलती है, जो बड़े मस्तिष्क को शक्ति प्रदान करने के लिए ऊर्जा प्रदान करती है।

इस विचार का समर्थन उन अध्ययनों से मिलता है जिनमें मस्तिष्क के आकार और आहार के बीच एक संबंध पाया गया है – विशेष रूप से, किसी जानवर के आहार में फल की मात्रा। फल एक उच्च शक्ति वाला भोजन है, लेकिन जानवरों के लिए एक जटिल पहेली पैदा करता है। विभिन्न फलों की प्रजातियाँ वर्ष के अलग-अलग समय पर पकती हैं और एक जानवर की घरेलू सीमा में फैली होती हैं। जिन जानवरों को इस तरह के अत्यधिक परिवर्तनशील भोजन की आवश्यकता होती है, उनके बड़े मस्तिष्क विकसित होने की अधिक संभावना हो सकती है।

यहां एक मुख्य धारणा यह है कि बड़े मस्तिष्क वाली प्रजातियां अधिक बुद्धिमान होती हैं और इसलिए अधिक कुशलता से भोजन ढूंढ सकती हैं। रॉयल सोसाइटी बी की कार्यवाही में आज प्रकाशित एक नए अध्ययन में, हमने पहली बार मस्तिष्क विकास की इस परिकल्पना का सीधे परीक्षण किया।

फल-आहार परिकल्पना के परीक्षण के लिए एक बड़ी समस्या यह है कि चारा खोजने की दक्षता को मापना कठिन है। जिन स्तनधारियों का हम अध्ययन करते हैं, वे लंबी दूरी तय करते हैं, आमतौर पर प्रति दिन तीन किलोमीटर से अधिक, जिससे प्रयोगशाला में यथार्थवादी अध्ययन स्थितियों को दोहराना मुश्किल हो जाता है।

कुछ शोधकर्ताओं ने प्रयोगात्मक रूप से जंगली जानवरों में भोजन वितरण में हेरफेर किया है, लेकिन जानवरों को मानव निर्मित खाद्य संसाधनों तक पहुंचना सीखने के लिए व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। अपने अध्ययन में, हमने पनामा में एक प्राकृतिक घटना का लाभ उठाया जो तब घटित होती है जब सामान्य रूप से जटिल फल पहेली तीन महीने की अवधि में पके फल की कुछ प्रजातियों तक ही सीमित हो जाती है। इस समय के दौरान, सभी फल खाने वाले स्तनधारियों को एक पेड़ की प्रजाति पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसका नाम है डिप्टरिक्स ओलीफ़ेरा।

हमारे लिए सौभाग्य से, डिप्टेरिक्स के पेड़ विशाल, कभी-कभी 40-50 मीटर तक ऊंचे होते हैं, और र्गिमयों में इनपर चमकीले बैंगनी फूल लगते हैं। हमने फूलों के मौसम के दौरान ड्रोन के साथ द्वीप का मानचित्रण किया और बैंगनी फूलों के पैच की पहचान की, लगभग हर डिप्टरिक्स का मानचित्रण किया जो कुछ महीनों बाद फल देता था।

इससे हमें उस फल संबंधी पहेली की पूरी जानकारी मिल गई जिसका सामना हमारे अध्ययन में जानवरों ने किया था, लेकिन हमें अभी भी यह परीक्षण करने की आवश्यकता थी कि विभिन्न मस्तिष्क आकार वाले जानवर कितनी कुशलता से इन पेड़ों तक पहुंचे। हमने दो बड़े दिमाग वाले वानर (मकड़ी बंदर और सफेद चेहरे वाले कैपुचिन) और दो छोटे दिमाग वाले रैकून रिश्तेदारों (सफेद नाक वाले कोटिस और ंिककजौस) को चुना।

फल लगने के दो मौसमों में, हमने 40 से अधिक जानवरों का गतिविधि डेटा एकत्र किया, जिसके परिणामस्वरूप 600,000 से अधिक जीपीएस स्थान प्राप्त हुए। फिर हमें यह पता लगाना था कि जानवर डिप्टरिक्स पेड़ों पर कब और कितनी देर के लिए आते थे।

यह एक जटिल कार्य था, क्योंकि यह जानने के लिए कि हमारे जानवर कब फलों के पेड़ों में चढ़ते थे और कब बाहर निकलते थे, हमें हर चार मिनट में जीपीएस फिक्स के बीच उनके स्थान का अनुमान लगाना पड़ता था। कुछ जानवरों को डिप्टरिक्स पेड़ों पर सोने की भी बुरी आदत थी। शुक्र है, हमारे कॉलर ने जानवरों की गतिविधि को रिकॉर्ड किया, इसलिए हम बता सकते थे कि वे कब सो रहे थे।

एक बार जब ये चुनौतियाँ हल हो गईं, तो हमने मार्ग दक्षता की गणना डिप्टरिक्स पेड़ों में सक्रिय रूप से बिताए गए दैनिक समय को तय की गई दूरी से विभाजित करके की। यदि बड़े दिमाग वाले जानवर फलों के पेड़ों पर अधिक कुशलता से जाने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करते हैं, तो हम उम्मीद करेंगे कि हमारे अध्ययन में बड़े दिमाग वाले आदिमानवों के पास अधिक कुशल चारागाह मार्ग होंगे।

यह वह नहीं है जो हमने पाया

दो गैर-वानरों की तुलना में दो बंदर प्रजातियों के पास अधिक कुशल मार्ग नहीं थे, जो मस्तिष्क के विकास की फल-आहार परिकल्पना में गंभीर सेंध लगाता है। यदि होशियार प्रजातियाँ अधिक कुशल होतीं, तो वे अपनी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को अधिक तेज़ी से पूरा करने में सक्षम होतीं, फिर शेष दिन आराम से बितातीं।

यदि ऐसा मामला होता, तो हमें उम्मीद होती कि भूखे जागने के बाद दिन के पहले कुछ घंटों में बंदर अधिक कुशलता से खुद को नियंत्रित करेंगे। दिन के पहले 2-4 घंटों को देखने पर, हमें एक ही परिणाम मिला: बंदर गैर-वानरों की तुलना में अधिक कुशल नहीं थे।

तो फिर बड़े दिमाग क्यों?

तो, यदि इन बड़े मस्तिष्कों का विकास वानरों को अधिक कुशल चारागाह मार्गों की योजना बनाने में मदद नहीं देता है, तो कुछ प्रजातियों में मस्तिष्क का आकार क्यों बढ़ गया? शायद इसका संबंध स्मृति से है। यदि बड़े मस्तिष्क वाली प्रजातियों की एपिसोडिक मेमोरी बेहतर है, तो वे अधिक भोजन प्राप्त करने के लिए फलों के पेड़ों की यात्रा के समय को अनुकूलित करने में सक्षम हो सकते हैं। हमारे डेटासेट के प्रारंभिक विश्लेषण इस स्पष्टीकरण का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन इस परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए हमें अधिक विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता होगी।

बुद्धिमत्ता को उपकरण के उपयोग से जोड़ा जा सकता है, जो किसी जानवर को अपने पर्यावरण से अधिक पोषक तत्व निकालने में मदद कर सकता है। हमारी चार अध्ययन प्रजातियों में से, सफेद चेहरे वाला कैपुचिन बंदर एकमात्र ऐसा बंदर है जिसे उपकरणों का उपयोग करके देखा गया है, और इसका मस्तिष्क भी सबसे बड़ा है (शरीर के आकार के सापेक्ष)।

हमारा अध्ययन इस परिकल्पना को भी समर्थन दे सकता है कि सामाजिक समूह में रहने की जटिलताओं को संभालने के लिए मस्तिष्क का आकार बढ़ता है। बड़े मस्तिष्क विभिन्न प्रकार के कशेरुकी जीवों (डॉल्फ़नि, तोते, कौवे) और अकशेरुकी (आॅक्टोपस) में विकसित हुए हैं।

हालांकि हमारा अध्ययन इन सभी प्रजातियों में मस्तिष्क के विकास के सटीक चालकों को निर्धारित नहीं कर सकता है, हमने अपेक्षाकृत गैर-आक्रामक तरीके से जंगली उष्णकटिबंधीय स्तनधारियों पर एक प्रमुख धारणा का सीधे परीक्षण किया है।

हमने प्रर्दिशत किया है कि नवीनतम सेंसर प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके हम जानवरों के प्राकृतिक वातावरण में विकास, मनोविज्ञान और व्यवहार के बारे में बड़ी परिकल्पनाओं का परीक्षण कर सकते हैं।

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