Raipur: एम्स में 42 साल की महिला को ब्रेन पेसमेकर लगाकर दी नई जिंदगी…

0
170

रायपुर: राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूरो सर्जरी विभाग के डाक्टरों को ब्रेन पेसमेकर लगाने में सफलता मिली है। यह सर्जरी देश के गिने चुने सरकारी अस्पतालों दिल्ली एम्स और निम्हास बेंगलुरु में होती है।

बलौदाबाजार की 42 वर्षीय महिला विगत सात वर्षों से पार्किंसंस बीमारी से पीड़ित थी। उसने कई अस्पतालों में जांच व इलाज कराई, लेकिन बीमारी ठीक नहीं हुई।

पीड़िता ने राजधानी के डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में जांच कराई तो बीमारी का पता चला, जो काफी बढ़ गई थी। डीकेएस के न्यूरोलाजिस्ट डा अभिजीत कोहट ने बीमारी को लेकर एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डा अनिल कुमार शर्मा से चर्चा की। दो अस्पताल के डाक्टरों ने डीप ब्रेन सिमुलेशन के तहत ब्रेन पेसमेकर सर्जरी पर काम करना शुरू कर दिया।

डा अनिल शर्मा ने बताया कि बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच गई थी, इसलिए तत्काल निर्णय लेना जरूरी था। पीड़िता के ब्रेन में इलेक्ट्रोड्स डालना था, इसलिए रेडियोथेरेपी विशेष डा एनके बोधे का सहयोग लिया गया। मुख्यमंत्री सहायकता कोष के माध्यम से पीड़िता की निश्शुल्क सर्जरी हुई है। इसके लिए निजी अस्पतालों में करीब 15 लाख खर्च करने पड़ते हैं।

ब्रेन में 14 एमएम का किया छेद

डा अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि पीड़िता के मस्तिष्क में ब्रेन पेसमेकर लगाने के लिए 14 एमएम का छेद किया गया था। उसी के माध्यम से इलेक्ट्रोड्स डालकर नान रिचार्ज पेसमेकर लगाया गया। पूरी प्रक्रिया में छह घंटे का समय लगा। प्रथम चरण में सिटी स्कैन के जरिए प्रथम चरण में मस्तिष्क में छेद करते तक महिला को होश में रखा गया था। सर्जरी के बाद महिला ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुकी है।

एनवायरमेंटल था पार्किंसंंस

डाक्टरों का कहना है कि पार्किन्सन बीमारी दो तरह जेनेटिक और एनवायरमेंटल होती है। महिला का पार्किंसंंस एनवायरमेंटल था, जो एक लाख की आबादी में करीब 70 लोगों को होती है।

रायपुर एम्स के निदेशक डा नितिन एम नागरकर ने कहा, मध्य भारत के किसी भी शासकीय अस्पताल में ऐसी सर्जरी नहीं की गई है। यह सर्जरी देश के गिने चुने शासकीय अस्पतालों में ही होती है। यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here