जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु राज्य स्तरीय बैठक संपन्न

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जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु राज्य स्तरीय बैठक संपन्न

रायपुर, 27 मार्च 2026 : मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर (अटल नगर) में योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्य की समीक्षा हेतु राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समन्वय समिति (IDCC) की बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता विभागीय सचिव भुवनेश यादव ने की। बैठक में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की उप महानिदेशक पी. संगीता, संयुक्त महारजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं जनगणना निदेशक, छत्तीसगढ़ कार्तिकेय गोयल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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सचिव भुवनेश यादव ने निर्देशित किया कि राज्य में प्रत्येक जन्म एवं मृत्यु का शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध पंजीयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सटीक एवं अद्यतन आंकड़े उपलब्ध हो सकें। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की संचालक रोक्तिमा यादव ने जन्म एवं मृत्यु पंजीयन की वर्तमान स्थिति एवं प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

बैठक में पंजीयन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समीक्षा के दौरान वर्ष 2025 में जन्म पंजीयन का सकल पंजीयन दर 108.4 प्रतिशत एवं शुद्ध दर 71.7 प्रतिशत तथा मृत्यु पंजीयन का सकल दर 102.6 प्रतिशत एवं शुद्ध दर 92.5 प्रतिशत दर्ज किया गया। कम प्रगति वाले जिलों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

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बैठक में सभी शासकीय एवं निजी संस्थानों में जन्म एवं मृत्यु का 21 दिनों के भीतर अनिवार्य पंजीयन सुनिश्चित करने तथा अस्पताल से डिस्चार्ज से पूर्व जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। साथ ही, 27 जनवरी 2026 से लागू छत्तीसगढ़ जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन, CRS-ORGI पोर्टल पर एकीकृत पंजीयन तथा प्रथम प्रमाण पत्र 7 दिवस के भीतर निःशुल्क प्रदान करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में विलंबित पंजीयन के लिए निर्धारित शुल्क, API आधारित डेटा साझाकरण, NIC क्लाउड पर सुरक्षित डेटा भंडारण, जन्म प्रमाण पत्र के साथ आधार संख्या जनरेशन के समन्वय तथा वर्ष 2015 से 2022 तक के अभिलेखों के डेटा माइग्रेशन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त फर्जी पंजीयन की रोकथाम, लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण, विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने एवं डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

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