बदलाव की बयार: मिट्टी की कमजोर दीवारों से ‘सपनों के आशियाने’ तक कुसुम बाई का प्रेरक सफर

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रायपुर,15 सितंबर 2026 : कच्ची दीवारें, बारिश में टपकती छत और हर मौसम में ढहने का डर—ग्राम पंचायत जी जामगांव,जनपद पंचायत कुरुद की कुसुम बाई के परिवार के लिए यह सिर्फ एक दैनिक चुनौती नहीं, बल्कि सालों की मजबूरी थी। मजदूरी से होने वाली सीमित आय में भोजन, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य की ज़रूरतें ही बमुश्किल पूरी हो पाती थीं। ऐसे में एक पक्का मकान बनाना केवल एक दूर का सपना बना हुआ था।

​उम्मीद की नई किरण:ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास योजना

वर्ष 2025-26 में पात्रता के आधार पर कुसुम बाई का चयन ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ के तहत हुआ। जनपद पंचायत द्वारा आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम में उन्हें निर्माण प्रक्रिया, सहायता राशि और गुणवत्ता मानकों का स्पष्ट मार्गदर्शन मिला। इसके बाद उनके सपनों का घर ईंट और सीमेंट की मजबूत दीवारों के रूप में साकार होने लगा।

​बदलाव: चिंता की जगह चेहरे पर चमक

आज कुसुम बाई अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित और मजबूत पक्के घर में रह रही हैं। अब न तो बारिश में सामान भीगने का खौफ है और न ही सीलन भरी दीवारों की चिंता। यह घर उनके लिए केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि परिवार के आत्मसम्मान, सुरक्षा और बच्चों के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है।

​प्रधानमंत्री मोदी को आभार और शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जीवन में आए इस अभूतपूर्व बदलाव से अभिभूत कुसुम बाई ने 17 सितंबर को आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस पर उन्हें बधाई संदेश भेजा। उन्होंने प्रधानमंत्री जी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्होंने हम जैसे गरीब परिवारों को पक्का घर देकर हमारे सपने को पूरा किया है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे इसी तरह देश और गरीबों की सेवा करते रहें।

​प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की असली सफलता यही है—जब एक जरूरतमंद परिवार को सुरक्षित छत मिलती है, तो उसके सशक्त और आत्मनिर्भर भविष्य की नींव भी उतनी ही मजबूत हो जाती है।

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