रायपुर, 9 अक्टूबर 2026: एमिटी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के POSH प्रकोष्ठ द्वारा शुक्रवार को विश्वविद्यालय के सभागार में “सुरक्षित, सम्मानजनक एवं समावेशी परिसर का निर्माण” विषय पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम (POSH) संबंधी जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य POSH प्रावधानों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा परिसर में गरिमा, सम्मान, समानता और सुरक्षा की संस्कृति को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एमिटी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो. (डॉ.) पीयूष कांत पांडे ने सभी के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं गरिमापूर्ण कार्यस्थल सुनिश्चित करने पर बल दिया। ‘वंदे मातरम्’, ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ और ‘भारत माता’ जैसे संबोधनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय संस्कृति में मातृत्व और मातृभूमि के प्रति गहरे सम्मान की परंपरा को रेखांकित किया।
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उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक चरण में महिलाएँ माँ, बहन, पत्नी और बेटी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। रामायण और महाभारत से मिलने वाली सीख का उल्लेख करते हुए उन्होंने महिलाओं की गरिमा और सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने सभी प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों से पेशेवर नैतिकता का पालन करने तथा कार्यस्थल पर अनुचित विचारों, व्यवहार और दृष्टिकोण के लिए कोई स्थान न होने देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की विशेषज्ञ वक्ता डॉ. प्रिया राव, एसोसिएट प्रोफेसर, विधि अध्ययन संस्थान, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ने POSH अधिनियम, 2013 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने जागरूकता, रोकथाम, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही के महत्व को समझाया।
विभिन्न केस स्टडी और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की परिस्थितियों, समय पर शिकायत दर्ज कराने, आंतरिक समितियों की भूमिका तथा शिकायतों के निस्तारण में गोपनीयता, निष्पक्षता और गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
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विश्वविद्यालय की प्रति-कुलपति प्रो. (डॉ.) सुमिता दवे ने सुरक्षित एवं समावेशी परिसर के निर्माण में लैंगिक संवेदनशीलता, पारस्परिक सम्मान और सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को भय, भेदभाव और उत्पीड़न से मुक्त सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।
उन्होंने प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों से जागरूकता बढ़ाने, जिम्मेदार आचरण अपनाने और सम्मानजनक एवं उत्पीड़न-मुक्त कार्यस्थल के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों को POSH प्रतिज्ञा भी दिलाई।
POSH प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो. मोनिका सैनी ने प्रकोष्ठ के कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों की जानकारी देते हुए जागरूकता, रोकथाम और नियमानुसार शिकायतों के निस्तारण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। सहायक प्राध्यापक डॉ. अमिता शाक्य ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की। इस आयोजन के माध्यम से विश्वविद्यालय ने कार्यस्थल की सुरक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता और समावेशी परिसर संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।









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