उमर अंसारी को बड़ी राहत, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी को अग्रिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति पीके मिश्रा की पीठ ने उमर अंसारी को मामले के संबंध में निचली अदालत में पेश होने और उसे जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने अदालत को सूचित किया कि अंसारी निचली अदालत में पेश नहीं हुए हैं। मामला एक सभा के दौरान लोगों को भड़काने के आरोप से जुड़ा है। प्रसाद ने उल्लेख किया कि ट्रायल कोर्ट में पेश हुए सह-अभियुक्तों को नियमित जमानत दी गई थी। उन्होंने अदालत से उमर अंसारी को निचली अदालत में पेश होने और अग्रिम जमानत के बजाय नियमित जमानत लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

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हालांकि, अंसारी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रसाद के दावे का विरोध करते हुए कहा कि अंसारी वास्तव में निचली अदालत में पेश हुए थे और जमानत बांड जमा किए थे। सिब्बल ने स्पष्ट किया कि हालांकि अंसारी मंच पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई आपत्तिजनक बयान नहीं दिया। दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए पीठ ने अंसारी को अग्रिम जमानत देने का फैसला किया।

अदालत ने उन्हें ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होने और जमानत बांड जमा करने का निर्देश दिया। इससे पहले 25 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में उमर को गिरफ्तारी से राहत दी थी। हालांकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले साल 19 दिसंबर को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें कहा गया था कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर उनके खिलाफ अपराध का मामला बनता है।

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अब्बास अंसारी (मऊ सदर सीट से एसबीएसपी उम्मीदवार और उमर के बड़े भाई), उमर अंसारी और 150 अन्य के खिलाफ एफआईआर 4 मार्च, 2022 को मऊ जिले के कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। एफआईआर में आरोप था कि 3 मार्च, 2022 को पहाड़पुरा मैदान में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान उमर अंसारी ने मऊ प्रशासन से हिसाब-किताब करने का आह्वान किया था और सपा सरकार के तहत अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के संबंध में कुछ बयान दिए थे।

हालांकि, सिब्बल ने दलील दी कि अंसारी ने बैठक के दौरान कोई आपत्तिजनक बयान नहीं दिया। उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था। पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी का 28 मार्च को उत्तर प्रदेश के बांदा के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

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