रायपुर, 13 अक्टूबर 2026 : पंडित रविशंकर शुक्ल जलाशय परियोजना (गंगरेल बांध) के अंतर्गत डूब प्रभावित जोगीडीह ग्राम के विस्थापित परिवारों के भूमि आवंटन और पुनर्वास से जुड़े दशकों पुराने मामलों के अंतिम और न्यायसंगत समाधान के लिए जिला प्रशासन धमतरी ने बड़ी पहल की है।
वर्ष 1972 से प्रारंभ हुई इस बहुउद्देश्यीय परियोजना के तहत प्रभावित परिवारों के दावों, उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और न्यायालयीन आदेशों का निष्पक्ष परीक्षण करने के लिए राज्य शासन के निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में 5-सदस्यीय उच्चस्तरीय अंतर्विभागीय समिति का गठन किया गया है।
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अपर कलेक्टर धमतरी की अध्यक्षता में गठित यह समिति गंगरेल बांध जनकल्याण डूबा संघ संघर्ष समिति द्वारा प्रस्तुत मांग पत्रों के आधार पर पात्र एवं अपात्र हितग्राहियों की पहचान कर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धमतरी ने जानकारी देते हुए बताया कि गंगरेल बांध परियोजना से धमतरी, बालोद एवं कांकेर जिलों के कुल 55 ग्राम प्रभावित हुए थे। जोगीडीह ग्राम के डूब प्रभावितों द्वारा समय-समय पर भूमि आवंटन, पुनर्वास और राजस्व अभिलेखों के संधारण से जुड़े विभिन्न आवेदन प्रस्तुत किए जाते रहे हैं।
इन प्रकरणों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 16 दिसंबर 2020 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश और शासन स्तर से जारी निर्देशों के अनुरूप तथ्यात्मक जांच की जा रही है।
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वर्तमान में समिति द्वारा पट्टा आवंटन एवं निरस्तीकरण से संबंधित दस्तावेजों, ग्राम नक्शे, खसरा अभिलेखों, वन भूमि के अभिलेखों तथा पूर्व में किए गए आवंटन की स्थिति का सूक्ष्मता से मिलान किया जा रहा है।
जांच प्रक्रिया पूरी तरह विधिक एवं प्रशासनिक मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही है, ताकि उपलब्ध भूमि की वास्तविक स्थिति और आवेदकों की वैधानिक पात्रता का सटीक मूल्यांकन हो सके।
समिति द्वारा जांच पूर्ण कर निष्कर्ष सौंपे जाने के बाद, प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर प्रचलित नियमों और माननीय न्यायालय के आदेशों के तहत निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्यवाही की जाएगी।








