गुवाहाटी में नेफेड की निदेशक मंडल बैठक सम्पन्न

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गुवाहाटी में नेफेड की निदेशक मंडल बैठक सम्पन्न

रायपुर, 20 मई 2026 : भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित(नेफेड) नई दिल्ली के निदेशक मंडल की बैठक असम प्रांत के गुवाहाटी में संपन्न हुई। नेफेड की बैठक में छत्तीसगढ़ मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी शशिकांत द्विवेदी शामिल हुए। द्विवेदी ने बोर्ड की बैठक में छत्तीसगढ़ के किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने प्रदेश में मक्का खरीदी मिलेट प्रोत्साहन, जैविक गुड़ एवं लघु वनोपज विपणन के लिए भी अपना सुझाव दिए।

द्विवेदी ने फेड की मेंबर समितियों एवं नेफेड द्वारा संचालित एफ पी ओ के माध्यम से बीज तथा बायोफर्टिलाइजर का उत्पादन एवं वितरण करने की अपील भी की।

उन्होंने बैठक में बताया कि पीडीएस में चना एवं जागरी (गुड़) की सप्लाई पहले नेफेड द्वारा की जाती थी। वर्तमान समय में भी पुनः सप्लाई करने की पहल की जाए ताकि नेफेड को एक अच्छा बिजनेस मिल सके। छत्तीसगढ़ में मक्का की खेती खरीफ एवं रबी दोनों सीजन में होती है। लेकिन इसकी खरीदी नेफेड द्वारा क्यों नही की जा रही है, इसकी भी पहल की जानी चाहिए।

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मिलेट को बढ़ावा देने के लिए कोदो, कुटकी,रागी खरीदी की भी छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं हैं। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में नाइजर सीड (रामतील) का प्रोडक्शन होता है लेकिन किसानों को इसका उचित मूल्य नहीं मिलता है, यदि नेफेड खरीदी करती है तो किसानों को इसका उचित मूल्य मिलेगा जिससे किसान अधिक मात्रा में उत्पादन करेंगे।

साथ ही छत्तीसगढ़ के कवर्धा एरिया में किसानों के द्वारा जैविक गुड़ बनाया जाता है लेकिन किसानों को इसका उचित मूल्य नहीं मिलता है। नेफेड यदि किसानों को बाजार उपलब्ध कराता है तो किसानों द्वारा इसका उत्पादन और अधिक बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश की वेलफेयर स्कीमों जैसे एकीकृत बाल विकास सेवाएं (आई सी डी एस), मध्याह्न भोजन आदि में भी नेफेड के उत्पादों को सप्लाई किया जाना चाहिए।

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छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर, कोंडागांव, बीजापुर, अंबिकापुर, रामानुजगंज एवं गरियाबंद में भी नेफेड बाजार खोला जा सकता है इससे नेफेड के उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी साथ ही आम आदमी को उच्च गुणवत्ता की सामग्री आसानी से सुलभ होगी।

बस्तर संभाग में लघु वनोपज यथा हर्रा, बहेरा, आंवला, इमली, शहद, अश्वगंधा, महुआ आदि उत्पादों की भी नेफेड द्वारा खरीदी किया जाना चाहिए। इससे वनांचल क्षेत्र के आदिवासियों को उचित मूल्य मिलेगा तथा नेफेड के आय में भी वृद्धि होगी।

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