रायपुर, 15 जून 2026 : राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अभियान का प्रथम चरण 15 जून को पूर्ण हो रहा है। इस दौरान सरगुजा जिले में प्राचीन ज्ञान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ पाण्डुलिपियां प्रकाश में आई हैं, जिनका डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत अम्बिकापुर नगर में दो संरक्षकों के पास संरक्षित महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया।
बिलासपुर चौक निवासी डॉ. सुधीर पाठक के संग्रह में संवत् 1866 में लिखित वनदुर्गा महात्म्य की एक दुर्लभ पाण्डुलिपि प्राप्त हुई। इसके साथ ही तत्कालीन सरगुजा महाराज को संबोधित भूमि संबंधी एक आवेदन पत्र भी मिला, जो स्वतंत्रता पूर्व काल का बताया गया है। डॉ. पाठक ने जानकारी दी कि यह पत्र उनके पूर्वजों द्वारा लिखा गया था और वर्षों से सुरक्षित रखा गया है।
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अम्बिकापुर नगर में वनदुर्गा पर आधारित कई महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियां पूर्व में भी प्राप्त हो चुकी हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाती हैं। पाण्डुलिपियों का अवलोकन करते हुए नगर निगम आयुक्त डी.एन. कश्यप ने कहा कि यह अभियान हमारी प्राचीन ज्ञान-संपदा को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। इससे वर्तमान और भावी पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक धरोहरों को समझने का अवसर मिलेगा। सर्वेक्षण के दौरान संयुक्त कलेक्टर शारदा अग्रवाल एवं जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र उपस्थित रहे।
अग्रवाल ने स्वयं पाण्डुलिपियों के डिजिटल अपलोड की प्रक्रिया में सहभागिता निभाई। इसी क्रम में बाबूपारा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता वेणुधर सिंह के पास महामाया विजयोत्सव वंदना नामक एक महत्वपूर्ण पाण्डुलिपि प्राप्त हुई। इस पाण्डुलिपि में महाराज रघुनाथ शरण सिंह देव तथा महाराज रामानुज शरण सिंह देव बहादुर की विरुदावली का उल्लेख मिलता है। हालांकि इसके लेखक और लेखन काल का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
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अपलोडिंग प्रक्रिया के दौरान जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र ने बताया कि राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत देशभर में अब तक एक करोड़ आठ लाख से अधिक पाण्डुलिपियों का जियो-टैगिंग और दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। वहीं सरगुजा जिले में 13 संरक्षकों के पास सुरक्षित 46 पाण्डुलिपियों को ज्ञानभारतम पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड किया गया है।
सर्वेयर गौरव पाठक द्वारा नगर निगम आयुक्त डी.एन. कश्यप एवं संयुक्त कलेक्टर शारदा अग्रवाल की उपस्थिति में पाण्डुलिपियों के डिजिटलीकरण और अपलोडिंग का कार्य संपन्न कराया गया। यह अभियान देश की अमूल्य सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आया है।








